Republic Day 2026:-विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी ने विधानसभा के अधिकारियों,कर्मचारियों सहित समस्त प्रदेशवासियों को दी 77वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई

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“भारत माता का मंदिर यह,समता का संवाद जहाँ,सबका शिव-कल्याण यहाँ है,पाएँ सभी प्रसाद यहाँ।”राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की इन महान पंक्तियों का स्मरण करते हुए उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने विधानसभा के अधिकारियों,कर्मचारियों सहित समस्त प्रदेशवासियों को 77वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई दीं।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि आज ही के दिन,वर्ष 1950 में,भारत ने अपने संविधान को अंगीकार किया था। संविधान की उद्देशिका में उल्लेख है-“हम भारत के लोग इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।”

अर्थात् भारत के नागरिकों ने स्वयं अपना संविधान बनाया,स्वयं उसे विधि का स्वरूप दिया और स्वयं को समर्पित किया। अपने भविष्य एवं कल्याण के संबंध में स्वयं निर्णय लेने की यही शक्ति ‘गण’ अर्थात जनता की सर्वोच्च शक्ति है।

अपने उद्बोधन में श्रीमती खण्डूडी ने कहा कि हमारा संविधान केवल अनुच्छेदों और अनुसूचियों का एक कागजी संकलन मात्र नहीं है,बल्कि यह एक जीवंत,सर्वहितकारी मार्गदर्शक है, जिसकी संरक्षण छाया में भारत ने निरंतर प्रगति की है।

इस अवसर पर उन्होंने संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहेब डॉ.भीमराव अंबेडकर को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए उन्हें नमन किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब की दूरदृष्टि और महान प्रतिभा का ही परिणाम है कि आज समाज का प्रत्येक वर्ग सशक्त एवं आत्मनिर्भर बन सका है।

इस महान राष्ट्रीय पर्व पर विधानसभा अध्यक्ष ने देश के स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि इन वीर सेनानियों का बलिदान इतना महान है कि देश सदैव उनका ऋणी रहेगा। साथ ही,श्रीमती खण्डूडी ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के समस्त शहीदों को भी नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की,जिनके त्याग और बलिदान से पृथक उत्तराखंड राज्य की संकल्पना साकार हो सकी।

इस अवसर पर रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ,सचिव विधायी धनंजय चतुर्वेदी,प्रभारी सचिव विधानसभा हेम पंत,विशेष कार्याधिकारी अशोक शाह,विनोद रावत,विशाल शर्मा,हरीश रावत,लक्ष्मी उनियाल,मयंक सिंघल,चन्द्रेश गौड़ एवं अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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