New Delhi:-भारत रंग महोत्सव के श्रेष्ठ नाटकों में एक रहा नाटक लेखक प्रसिद्ध कहानीकार डॉ.हरिसुमन बिष्ट का नाटक ‘खुलल रह गईल खिड़की के एगो पाला’

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राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय,दिल्ली ने ‘अंतरराष्ट्रीय भारत रंग महोत्सव का आयोजन 27 जनवरी से 20 फरवरी तक किया जिसमें देश-विदेश के लगभग 90 नाटक दिल्ली में मंचित हुए। इस महोत्सव में वैशाली बिहार में जन्मे चर्चित युवा रंगकर्मी कुमार वीर भूषण द्वारा भारत और पाकिस्तान के युद्ध में शामिल एक फौजी के घर नहीं लौटने की कहानी को उसके पत्नी,पिता और माता के दर्द के साथ समाज के विसंगतियों से भरी मानसिकता के केंद्र में नाटक ‘खुलल रह गइल खिड़की के एगो पाला’ का मंचन किया गया।

नाटक के लेखक प्रसिद्ध कहानीकार डॉ. हरिसुमन बिष्ट हैं और भोजपुरी रूपांतरण राकेश कुमार का है। नाटक के सभी दृश्य फौजी नागेश्वर के घर का है। पिता जागेश्वर गांव के साहूकार कमलेश से कर्ज लेकर पढ़ाता है,जवाना करता है और सोचता है कि बेटा की नौकरी हो गई है अब सुखी जीवन होगा। लेकिन पुत्र युद्ध के बाद नहीं लौटता है,नागेश्वर की मां पुत्र की तलाश में निकलती और मर खप जाती है। बहु आनंदी इंतजार के रहती है,ग्रामीण उस पर ससुर से ही नाजायज संबंध का आरोप लगाते है,कारण घर में दो ही सदस्य शेष बचे हैं। पिता जलेश्वर का घर से निकलना दूभर हो जाता है।

साहूकार कमलेश कई बार आनंदी की अस्मत लूटने की कोशिश करता है। गांव के कई युवा हवस में घात लगाए रहते हैं। अंत में प्रधान ग्रामीणों के साथ आनंदी को पिता सहित गांव से निकलने आते हैं,लेकिन नाटक के प्रारंभ से ही हिम्मत,न्याय,सच और स्वाभिमान के साथ जीने वाले पढ़ी लिखी साहसी लड़की बहु आनंदी कभी कमजोर नहीं पड़ती है। एक फौजी की पत्नी के तरह घर में रखे कुल्हाड़ी,हंसिया ले कर शेरनी की तरह सबको ललकार देती है। मन के मैल से भरे ग्रामीण भाग खड़े होते हैं। आनंदी एक पुत्र को जन्म देती है और उसको भी फौज में भेजने का संकल्प लेती है।

नाटक देश पर कुर्बानी के एक गीत के साथ समाप्त होता है। नाटक का संगीत लाइव था। गणेश वंदना के साथ कई मार्मिक गीत लिखे गए थे। नाटक में आनंदी के रूप में नम्रता सिंग ने उत्कृष्ट अभिनय किया। पिता जलेश्वर राकेश कुमार,मां प्रिया,फौजी नागेश्वर राघव शुक्ला,साहूकार कमलेश शशिकांत और प्रधान अतुल ढींगरा का अभिनय ने चरित्रों के साथ न्याय किया और प्रशंसनीय रहा। ग्रामीणों में हेमलता मौर्य,आयूषिका,खुशबू कुमारी,परितोष,प्रेम,शिवम,राघव राव,शिव शंकर ने अच्छा अभिनय किया।

नाटक में सचिन का संगीत और गायन प्रभावपूर्ण और संतुलित था जिसमें अतीक खान के नगाड़ा और प्रशांत वसु के ढोलक वादन  का योगदान अच्छा रहा। नाटक में रचनात्मक और संतुलित प्रकाश परिकल्पना और उसका संचालन रंजित कुमार का और सह निर्देशन अतुल ढींगरा का था। नाटक की प्रस्तुति में सभी टिकट बिका था और दर्शकों ने नाटकों को पूरी  एकाग्रता के साथ से देखा। यह प्रस्तुति अच्छी प्रस्तुतियों में खूब चर्चा पाई। प्रस्तुति में दिल्ली सरकार के मैथिली और भोजपुरी अकादमी का सहयोग था और प्रस्तुति बाबू शिवजी राय फाउंडेशन की थी।

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