Uttarakhand:-लोक भवन में हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय,द्वारा ‘एकीकृत चिकित्सा संगोष्ठी’ का आयोजन

0
4

लोक भवन में बुधवार को हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय,द्वारा ‘‘एकीकृत चिकित्सा संगोष्ठी’’आयोजित की गई। इस संगोष्ठी में देश-विदेश के चिकित्सा विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों से जुड़े विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में महर्षि इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी,अमेरिका के प्रो.एवं चेयर,डिपार्टमेंट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन डॉ.चार्ल्स एल्डर और अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडियन ओरिजिन के डॉ.अमित शाह ने भी अपने विचार रखे।

  • लोक भवन में आयोजित हुई एकीकृत चिकित्सा संगोष्ठी।
  • चिकित्सा की विभिन्न पद्धतियों के समन्वय पर जोर।
  • एकीकृत चिकित्सा से रोगी और मानवता को बेहतर स्वास्थ्य देने का लक्ष्य:-राज्यपाल।

इस अवसर पर भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा,पद्मश्री डॉ.एस.सी.मनचंदा,पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय,नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन की चेयरपर्सन डॉ.मनीषा कोठेकर तथा एचएनबी उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो.(डॉ.)भानु दुग्गल ने ‘इंटीग्रेटिव मेडिसिन’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर आयुष,आईसीएमआर-एनआईआरडीएच और हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के बीच सहयोग के लिए एमओयू भी हुआ। इसका उद्देश्य आयुष को आधुनिक चिकित्सा एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहलों से जोड़ना,डिजिटल स्वास्थ्य में प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना तथा एआई और दूरस्थ निगरानी जैसी तकनीकों के माध्यम से अनुसंधान एवं नवाचार को गति देना है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने कहा कि एकीकृत चिकित्सा किसी चिकित्सा पद्धति के दूसरी पद्धति से प्रतिस्पर्धा की बात नहीं है,बल्कि इसका उद्देश्य सभी चिकित्सा प्रणालियों की सामूहिक शक्ति का उपयोग करते हुए रोगी और संपूर्ण मानवता को बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि दुनिया में इस दिशा में एक नई सोच और जागरूकता विकसित हो रही है तथा भारत और उत्तराखण्ड को इसमें महत्वपूर्ण नेतृत्वकारी भूमिका निभानी होगी।

राज्यपाल ने कार्यक्रम के दौरान हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय,भारत सरकार के आयुष मंत्रालय और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के मध्य हुए एमओयू का महत्वपूर्ण कदम बताते हुए विश्वास व्यक्त किया कि इसके माध्यम से शोध,नवाचार, शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की जाएंगी।

उन्होंने कहा कि आज का आयोजन केवल एक संगोष्ठी तक सीमित नहीं है,बल्कि यह चिकित्सा के विभिन्न दृष्टिकोणों को एक साझा मंच पर लाने और मानव कल्याण के लिए नई दिशा तय करने की पहल है। राज्यपाल ने कहा कि वे इस ऐतिहासिक आयोजन से अत्यंत संतुष्ट हैं और विश्वास है कि इसके दूरगामी प्रभाव होंगे तथा इसका लाभ भारत ही नहीं,बल्कि पूरी मानवता को प्राप्त होगा।

केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जादव ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और आधुनिक विज्ञान के बीच बेहतर समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि आयुष मंत्रालय इस दिशा में राज्य सरकार के साथ मिलकर कार्य करेगा। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए नवाचार,नई तकनीक,टेलीमेडिसिन और मोबाइल आयुष इकाइयों के व्यापक उपयोग की आवश्यकता बताई।

केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री ने कहा कि एकीकृत चिकित्सा व्यवस्था के लिए आयुष मंत्रालय,राज्य सरकार,विश्वविद्यालयों,मेडिकल कॉलेजों और अनुसंधान संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एलोपैथी,आयुर्वेद और अन्य चिकित्सा पद्धतियों के विशेषज्ञों को रोगी के बेहतर स्वास्थ्य को केंद्र में रखकर संयुक्त अनुसंधान,प्रशिक्षण और शैक्षणिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय से राज्य में एकीकृत चिकित्सा का पहला ’’सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’’ स्थापित करने की दिशा में पहल करने का आह्वान किया और कहा कि इस महत्वपूर्ण पहल के लिए केंद्र सरकार विश्वविद्यालय और राज्य सरकार को पूरा सहयोग प्रदान करेगी।

कार्यक्रम में चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल,योग गुरु स्वामी रामदेव,विधायक दुर्गेश्वर लाल,सचिव राज्यपाल रविनाथ रामन,सचिव रंजना राजगुरु,अपर सचिव रीना जोशी,अपर सचिव विजय कुमार जोगदण्डे,कुलपति आयुर्वेद विश्वविद्यालय डॉ.अरुण कुमार त्रिपाठी सहित विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here