
लोक भवन देहरादून में गुरुवार को ‘अमृतकाल के लिए पर्यावरण और एआई’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी का मुख्य विषय ‘सतत हिमालयी भविष्य के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ था जिसमें पर्यावरण संरक्षण,जलवायु परिवर्तन,हिमालयी पारिस्थितिकी और एआई के बेहतर उपयोग पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
- लोक भवन में सतत हिमालयी भविष्य के लिए एआई और पर्यावरण के समन्वय पर मंथन।
- मानव कल्याण और प्रकृति संरक्षण के लिए एआई के सही उपयोग पर जोर।

इस संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग करते हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने कहा कि आज दुनिया के सामने पर्यावरण,पारिस्थितिकी और जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे समय में 21वीं सदी की महत्वपूर्ण उपलब्धि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को प्रकृति के साथ जोड़कर देखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमारी चुनौतियां ही हमारे लिए अवसर भी बन सकती हैं,यदि हम तकनीक के माध्यम से उनके समाधान खोजने का प्रयास करें।
राज्यपाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर लोगों के मन में कई तरह की आशंकाएं रहती हैं। जरूरत इस बात की है कि इसे समझा जाए और मानव कल्याण तथा प्रकृति के संरक्षण के लिए इसका सही उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से हम प्राकृतिक बुद्धिमत्ता को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रकृति ने हमें जीवन और समृद्धि का रास्ता दिखाया है। विकास तभी सार्थक होगा,जब तकनीकी प्रगति के साथ प्राकृतिक संतुलन भी बना रहे। हिमालय और उसके प्राकृतिक संसाधन हमारे लिए अमूल्य हैं। इसलिए विकास की दिशा तय करते समय प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
राज्यपाल ने कहा कि आने वाले समय में वैश्विक प्रतिस्पर्धा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आधुनिक तकनीक और विनिर्माण जैसे क्षेत्र इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने युवाओं से नवाचार और तकनीकी ज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत का युवा अपनी प्रतिभा और नवाचार के बल पर विश्व स्तर पर नई पहचान बनाएगा।
संगोष्ठी में उपस्थित हेस्को के संस्थापक पद्मश्री डॉ.अनिल प्रकाश जोशी ने अपने संबोधन में प्रकृति और नैसर्गिक बुद्धिमत्ता (नेचुरल इंटेलिजेंस) के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि केवल तकनीकी विकास पर्याप्त नहीं है,प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर ही वास्तविक और स्थायी समृद्धि हासिल की जा सकती है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और प्राकृतिक बुद्धिमत्ता का समन्वय समय की आवश्यकता है।
भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के अध्यक्ष एवं वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक डॉ.शेखर सी.मांडे ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मूल अवधारणा और उसके विभिन्न उपयोगों पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता किस प्रकार हमारे जीवन और विभिन्न क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकती है। राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान के महानिदेशक डॉ.एम.एम.त्रिपाठी ने ऑनलाइन कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित पाठ्यक्रमों के विस्तार पर प्रस्तुति दी। उन्होंने युवाओं और विद्यार्थियों को नई तकनीक का प्रशिक्षण देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
वीर माधो सिंह भण्डारी तकनीकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर ने स्वागत संबोधन दिया और संगोष्ठी के उद्देश्य एवं विषयवस्तु की जानकारी दी। इनमोबी की वैश्विक वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ.सुबी चतुर्वेदी ने उद्योग जगत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका और संभावनाओं पर विचार रखे। टेक्नो हब के मुख्य तकनीकी अधिकारी सिद्धार्थ माधव ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विषय कक्ष की अवधारणा और उसके उपयोग की जानकारी दी।
इस अवसर पर वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में सेंटर ऑफ एक्सिलेंस फार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन माउंटेन सिस्टम ‘‘हिम एआई‘‘ का शुभारंभ भी हुआ। यह केंद्र हिमालयी क्षेत्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं,पर्यावरणीय संवेदनशीलता और आपदा संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधान,अनुसंधान एवं नवाचार, सतत विकास तथा आपदा प्रतिरोधक क्षमता के क्षेत्र में कार्य करेगा।
संगोष्ठी में यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो.दुर्गेश पंत,सचिव राज्यपाल रविनाथ रामन,विधिक सलाहकार कौशल किशोर शुक्ल,अपर सचिव रीना जोशी,शिक्षा,विज्ञान,तकनीक,उद्योग और पर्यावरण क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों,शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।
















