Dehradun:-दून विश्वविद्यालय में पांच दिवसीय नाट्य समारोह का शुभारंभ,प्रथम दिवस पर ‘तुगलक’ का दमदार मंचन,वरिष्ठ रंगकर्मियों का हुआ सम्मान

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विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर दून विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित पांच दिवसीय नाट्य समारोह का शुभारंभ प्रथम दिवस पर ‘तुगलक’ के प्रभावशाली मंचन के साथ हुआ। यह आयोजन रंगमंच विभाग दून विश्वविद्यालय एवं दून घाटी रंगमंच,देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।

दून घाटी रंगमंच,देहरादून द्वारा प्रस्तुत इस नाटक का लेखन प्रख्यात नाटककार गिरीश कर्नाड द्वारा किया गया है तथा मंच परिकल्पना एवं निर्देशन बृजेश नारायण ने किया। लगभग 1 घंटा 30 मिनट की अवधि वाले इस नाटक ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। कलाकारों के सशक्त अभिनय, प्रभावशाली संवादों और सटीक निर्देशन ने प्रस्तुति को अत्यंत प्रभावशाली बना दिया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।

‘तुगलक’ एक ऐतिहासिक नाटक है, जो 14वीं शताब्दी के शासक मुहम्मद बिन तुगलक के जीवन,उनके आदर्शों और उनके पतन को दर्शाता है तथा समकालीन राजनीति पर भी गहरा संकेत प्रस्तुत करता है।

इस अवसर पर दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो.सुरेखा डंगवाल,कुलसचिव दुर्गेश डिमरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। साथ ही दून घाटी रंगमंच के अध्यक्ष डॉ.लक्ष्मी नारायण,एकलव्य थिएटर के अध्यक्ष महेश नारायण,डॉ.अजीत पंवार एवं कैलाश कंडवाल की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

कार्यक्रम के दौरान दून घाटी रंगमंच से जुड़े उन वरिष्ठ रंगकर्मियों को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने पिछले 50 वर्षों में रंगमंच के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

नाटक में मुख्य भूमिकाओं में बृजेश नारायण(तुगलक),आदेश नारायण(बरनी),राजेश भारद्वाज (अमीर/काका),संदीप सिंह(नजीब),रविकांत(शाहबुद्दीन),नितिन पाल(अज़ीज़),सुधीर कुमार (आज़म),राहुल सिंह(रतन सिंह),तुषार(सिपाही,ढिंढोरची,जवान),मीतू(औरत),शेखर(भीड़.अमीर) सहित अन्य कलाकारों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति दी।

यह नाट्य समारोह आगामी दिनों में भी विभिन्न नाटकों की प्रस्तुतियों के साथ जारी रहेगा।

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