Dehradun:-राज्यपाल गुरमीत सिंह ने रेंजर्स ग्राउंड में आयोजित ‘दिव्य कला मेला’कार्यक्रम में किया अतिथि कहा-दिव्यांगता बाधा नहीं,संकल्प और आत्मबल का प्रतीक

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राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल(से नि)गुरमीत सिंह ने रविवार को रेंजर्स ग्राउंड,देहरादून में आयोजित “दिव्य कला मेला”कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय,भारत सरकार द्वारा आयोजित इस मेले में देशभर से आए दिव्यांगजनों ने अपने उत्पादों और कलाकृतियों का प्रदर्शन किया। राज्यपाल ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन कर प्रतिभागियों से संवाद किया तथा उनके उत्पादों और नवाचारों की जानकारी प्राप्त करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत लाभार्थियों को रियायती ऋण के चेक भी वितरित किए।

  • देहरादून में आयोजित दिव्य कला मेले में राज्यपाल ने किया प्रतिभाग।
  • समावेशी विकास में दिव्यांगजनों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक-राज्यपाल।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यहाँ प्रदर्शित प्रत्येक उत्पाद,कला-कृति और प्रस्तुति यह सिद्ध करती है कि दिव्यांगता कोई बाधा नहीं,बल्कि संकल्प,आत्मबल और रचनात्मकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मेले में प्रदर्शित उत्पाद दिव्यांगजनों की रचनात्मकता,उत्पादकता और आत्मविश्वास का प्रेरक उदाहरण है।

राज्यपाल ने कहा कि समावेशी विकास तभी सार्थक है जब समाज का कोई भी वर्ग विकास की मुख्यधारा से वंचित न रहे। दिव्यांगजन सहानुभूति के नहीं,बल्कि सम्मान,अवसर और समान भागीदारी के अधिकारी हैं। राष्ट्र निर्माण में उनकी सक्रिय भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब दिव्यांगजनों को उचित मंच और संसाधन मिलते हैं तो वे अपनी प्रतिभा से समाज और राष्ट्र को नई दिशा देने में सक्षम होते हैं। आज देश में दिव्यांगजनों के प्रति दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन आया है और वे विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कर रहे हैं।

राज्यपाल ने कहा कि आधुनिक तकनीक और एआई और टेक्नोलॉजी दिव्यांगजनों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रही है। इसके माध्यम से दिव्यांगजन अपनी क्षमताओं का बेहतर उपयोग कर सृजन,नवाचार और उत्पादन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

राज्यपाल ने कहा कि यह मेला “लोकल फॉर वोकल” के मंत्र को साकार करता है। यहाँ प्रदर्शित उत्पाद परिश्रम,समर्पण और आत्मविश्वास की प्रेरक कहानियाँ हैं। इन उत्पादों को अपनाकर हम न केवल स्थानीय उद्यमियों को प्रोत्साहित करते हैं,बल्कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे दिव्यांगजनों के उत्पादों और उद्यमों को प्रोत्साहित कर समावेशी समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएँ।

“दिव्य कला मेला” कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री बी.एल.वर्मा ने कहा कि यह आयोजन मानवीय सामर्थ्य का उत्सव है। यह मेला दिव्यांग सशक्तीकरण, आत्मनिर्भरता और सम्मान का प्रतीक है तथा देशभर के दिव्यांग कलाकारों और उद्यमियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का सशक्त मंच प्रदान करता है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ‘सुगम्य भारत अभियान’,दिव्यांग पेंशन योजना,विशेष शिक्षा संस्थान और कौशल विकास कार्यक्रम जैसी अनेक योजनाओं के माध्यम से दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण की दिशा में प्रभावी कार्य हो रहा है।

इस अवसर पर सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह,विधायक खजान दास,सीएमडी,नेशनल दिव्यांगजन फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन अनिल कुमार,सीजीएम डॉ.विनीत राणा,एजीएम शंकर शर्मा,सचिव,समाज कल्याण विभाग श्रीधर बाबू अदांकी,अपर सचिव प्रकाश चंद्र,आयुक्त दिव्यांगजन सशक्तीकरण एस.गोविंद राज,निदेशक प्रदीप ए.एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।