Kanpur:-छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में भारतीय भाषाओं पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न,वक्ताओं ने कहा-मां और मातृभाषा का कोई विकल्प नहीं

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कानपुर छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर में प्रोफेसर विनय कुमार पाठक के दूरदर्शी मार्गदर्शन तथा निदेशक डॉ.सर्वेश मणि त्रिपाठी के नेतृत्व में स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज़ में ‘भारतीय भाषा परिवार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता-इक्कीसवीं सदी की चुनौतियां एवं संभावनाएं’ विषय पर चल रहा दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न हो गया।

  • ‘भारतीय भाषा परिवार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता-इक्कीसवीं सदी की चुनौतियां एवं संभावनाएं’।
  • भारतीय भाषाओं के संवर्धन एवं विकास के लिए शिक्षा मंत्रालय की पहल महत्वपूर्ण।
  • भारतीय भाषा,भारतीय ज्ञान परम्परा को साथ लेकर चलनी जरूरी।

सम्मेलन के दूसरे दिन विभिन्न सत्रों में वक्ताओं ने कहा कि भारतीय भाषाओं के संवर्धन एवं विकास के लिए शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार की ये पहल भारतीय भाषाओं के लिए महत्वपूर्ण है। नई शिक्षा नीति के त्रिभाषा फॉर्मूला का लक्ष्य है कि किसी भी व्यक्ति के ज्ञान अर्जन के लिए तथा मौलिकता के लिए उसे अपनी मातृभाषा में ही शिक्षा प्राप्त हो। सम्मेलन में लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो.पवन अग्रवाल ने भारतीय भाषाओं को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने मत व्यक्त किया कि हमें यह स्वीकार करना होगा कि हिंदी ने देश को एक सूत्र में बाँधने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग से डॉ.आशुतोष मिश्रा ने इस बात पर बल दिया कि भारतीय भाषाएँ आपस में जैविक रूप से जुड़ी हुई हैं तथा भारतीय भाषाओं को उत्तर भारतीय और द्रविड़—इन दो श्रेणियों में बाँटना एक औपनिवेशिक भेदभाव का परिणाम है। इस सम्मेलन में 12 राज्यों तथा 5 भाषाओं का प्रतिनिधित्व देखने को मिला। जो इसके व्यापक महत्व को रेखांकित करता है। इसके बाद समापन सत्र हुआ जिसकी अध्यक्षता विश्वविद्यालय के सीडीसी प्रो.राजेश द्विवेदी ने की।

मुख्य अतिथि डॉ.उमा शंकर पांडेय ने मातृभाषा के महत्व पर प्रकाश डाला। सीडीसी प्रो.द्विवेदी ने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई दी। सत्र का संचालन स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज़ के हिन्दी विभाग के प्रभारी डॉ.श्रीप्रकाश ने किया। डॉ.प्रभात गौरव मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापन किया गया।

विभिन्न शैक्षणिक सत्रों में आमंत्रित अध्यक्षों के रूप में प्रो. विपिन कुमार सिंह(विभागाध्यक्ष,अंग्रेज़ी विभाग,सीयूएसबी),प्रो.अंजिता सिंह(ए.एन.डी.कॉलेज, कानपुर),प्रो.जबाकुसुम(ए.एन.डी.कॉलेज,कानपुर),प्रो.राजेश कुमार वर्मा(इलाहाबाद विश्वविद्यालय),प्रो.आर.पी.प्रधान(वीएसएसडी कॉलेज,कानपुर),डॉ.प्रत्युष चंद्रा(वीएसएसडी कॉलेज),प्रो.वीरेंद्र सिंह यादव(एस.एम.आर.विश्वविद्यालय,लखनऊ),प्रो.निरंजन जेना(विश्व भारती विश्वविद्यालय),प्रो.लक्ष्मीकांत पांडेय (पी.पी.एन.कॉलेज),डॉ.अमित कुमार दुबे(ब्रह्मावर्त पी.जी.कॉलेज),डॉ.आशुतोष मिश्रा(दिल्ली विश्वविद्यालय)तथा प्रो.मीना गुप्ता(विभागाध्यक्ष,संस्कृत विभाग,पी.पी.एन.कॉलेज)उपस्थित रहे।

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