
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने शनिवार को लोक भवन में आयोजित ‘उत्तराखण्ड डीप-टेक 2030: पहाड़ के लिए तकनीक का निर्माण’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों,शिक्षाविदों,रक्षा विशेषज्ञों,उद्यमियों,कलाकारों और तकनीक से जुड़े प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई),नवाचार और आधुनिक तकनीक के माध्यम से शिक्षा,रक्षा,उद्यमिता तथा पर्वतीय क्षेत्रों की चुनौतियों के समाधान पर चर्चा की गई।

‘उत्तराखण्ड डीप-टेक 2030’ राज्य को आधुनिक तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की एक दूरदर्शी पहल है। इसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डीप-टेक (उन्नत तकनीकों) का उपयोग कर उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियों से जुड़ी चुनौतियों,जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा,आपदा प्रबंधन,शिक्षा और आजीविका के समाधान विकसित करना है। साथ ही, तकनीक को आम नागरिकों के लिए उपयोगी और सुलभ बनाते हुए युवाओं में नवाचार,कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देना है,ताकि उत्तराखण्ड तकनीकी विकास और नए अवसरों का प्रमुख केंद्र बन सके।
इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि ‘उत्तराखण्ड डीप-टेक 2030’ की पहल तकनीक को पहाड़ की जरूरतों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास होना चाहिए कि तकनीक केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे,बल्कि इसका लाभ दूरस्थ गांवों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग शिक्षा,स्वास्थ्य,कृषि,पर्यटन,आपदा प्रबंधन और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। इससे स्थानीय समस्याओं के समाधान के साथ-साथ विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य के विकास में आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। तकनीक का वास्तविक लाभ तभी है,जब वह आम लोगों के जीवन को आसान बनाए और पहाड़ की जरूरतों के अनुरूप समस्याओं का समाधान करे।
युवाओं को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वर्ष 2047 में जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा,तब देश को विकसित बनाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने युवाओं से सीखने,नए विचारों पर काम करने और समाज की समस्याओं के समाधान के लिए तकनीक का उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा ऐसे तकनीकी समाधान विकसित करें,जो पहाड़ के किसानों,सैनिकों,विद्यार्थियों और ग्रामीण समुदायों के लिए उपयोगी हों।
राज्यपाल ने कहा कि तकनीकी प्रगति के साथ मानवीय मूल्यों, अनुशासन और अच्छे चरित्र को बनाए रखना भी जरूरी है। एआई मानवीय बुद्धि का विकल्प नहीं,बल्कि हमारी क्षमताओं को बढ़ाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि डीपफेक,भ्रामक सूचनाओं और निजी जानकारी के दुरुपयोग जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए तकनीक का जिम्मेदारी से उपयोग किया जाना चाहिए।
राज्यपाल ने इस आयोजन के लिए एआई थीम रूम की टीम,दून विश्वविद्यालय,कार्यक्रम से जुड़े सभी सहयोगियों,पैनलों के प्रतिभागियों और विशिष्ट अतिथियों को बधाई दी।
कार्यक्रम के दौरान तीन विषयों पर पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। इन चर्चाओं में रक्षा,शिक्षा,रचनात्मक उद्योग और उद्यमिता के क्षेत्रों में एआई के व्यावहारिक उपयोग तथा उत्तराखण्ड में तकनीक आधारित विकास की संभावनाओं पर विशेष जोर दिया गया।
पहली चर्चा में एआई के दौर में रक्षा,नेतृत्व,उभरती तकनीकों और हिमालयी सुरक्षा पर विचार-विमर्श हुआ जिसमें कारगिल युद्ध की अनुभवी कैप्टन याशिका हटवाल त्यागी (सेवानिवृत्त),लेफ्टिनेंट कर्नल नरेन ठाकुर (सेवानिवृत्त),मेजर कविश अग्रवाल (सेवानिवृत्त),कमांडर कुलदीपक मित्तल(सेवानिवृत्त)तथा मेजर आर.एस.साम्ब्याल(सेवानिवृत्त) ने रक्षा क्षेत्र में एआई की भूमिका,उभरती तकनीकों,मानवीय नेतृत्व और हिमालयी सुरक्षा से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए।
दूसरी पैनल चर्चा में उच्च शिक्षा और तकनीक के बदलते स्वरूप के अनुरूप उत्तराखण्ड के युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने पर चर्चा की गई। इस परिचर्चा में आईसीएफएआई विश्वविद्यालय,देहरादून के कुलपति प्रो.(डॉ.)राम करण सिंह,डीबीयूयू के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट की डीन एवं प्रोफेसर डॉ.चंद्रमौली ढौंडियाल,एड्रॉइट प्रोग्रेसिव स्कूल,देहरादून के अध्यक्ष हरिंदर एस.जुनेजा,डीबीएस ग्लोबल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो.(डॉ.)संजय जसोला,तुलाज यूनिवर्सिटी,देहरादून के प्रो-वाइस चांसलर प्रो.शैलेन्द्र तिवारी तथा उत्कर्ष कंसल्टेंसीज के उत्कर्ष रस्तोगी ने एआई के दौर में शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और युवाओं को भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने पर अपने विचार रखे।
तीसरे सत्र में रचनात्मकता, स्टार्टअप और एआई आधारित अर्थव्यवस्था में नए अवसरों पर विचार साझा किए गए। चर्चा में अभिनेता मुकेश तिवारी,अभिनेत्री राधा भट्ट,लाइफ कोच राधिका चोपड़ा,डिजिटल क्रिएटर मेघा चौबे,बैफलसोल टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के ग्रुप सीटीओ विकास गर्ग,नूरॉन टीओटी प्राइवेट लिमिटेड के सह-संस्थापक मनमोहन अग्रवाल तथा अमित मिनोचा ने रचनात्मकता,स्टार्टअप,उद्यमिता और एआई आधारित अर्थव्यवस्था में उभरती संभावनाओं पर विचार साझा किए।
कार्यक्रम में लेखिका एवं अधिवक्ता विदुषी निशंक,असिस्टिव टेक्नोलॉजीज एक्सेलेरेटर,समर्थानम ट्रस्ट के निदेशक जयंत श्रीनिवास,अभिनेता दिलीप ताहिल सहित विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों ने अपने विचार रखे।
इस अवसर पर सचिव पंकज कुमार पाण्डे,अपर सचिव रीना जोशी,टैक्नो हब के सीटीओ सिद्वार्थ माधव सहित कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों,शिक्षाविदों,उद्यमियों,कलाकारों और तकनीक से जुड़े प्रतिनिधियों व विभिन्न कॉलेजों के छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया।




















