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Home देश-विदेश Ambedkar Jayanti:-डॉ.भीमराव अंबेडकर-जनतांत्रिक समाज व्यवस्था के पक्षधर
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Ambedkar Jayanti:-डॉ.भीमराव अंबेडकर-जनतांत्रिक समाज व्यवस्था के पक्षधर

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admin
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April 14, 2023
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    डॉ.विनोद बछेती

    आज भारत में ही नहीं,विश्व भर में असमानता,अस्पृश्यता,भेदभाव,हिंसा जैसे सवालों के बीच संविधान निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर समानता,समता,लोकतंत्र के मूल्यों की स्थापना के सिद्धांत प्रासंगिक हैं। भीमराव अंबेडकर ने भारत में अस्पृश्यता और सामाजिक असमानता के उन्मूलन के लिये अपना संपूर्ण जीवन न्योछावर कर दिया था।

    भारत रत्न डॉ.अंबेडकर ने अपने जीवन में सामाजिक,आर्थिक,राजनीतिक आदि क्षेत्रों में अनगिनत कार्य करके राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अंबेडकर की कानूनी विशेषज्ञता और विभिन्न देशों के संविधान का ज्ञान संविधान के निर्माण में बहुत मददगार साबित हुआ। वह संविधान सभा की मसौदा समिति के अध्यक्ष बने और उन्होंने भारतीय संविधान को तैयार करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    उनकी कही हुई बात आज सत्य सिद्ध हो रही है। उन्होंने एक मज़बूत केंद्र सरकार का समर्थन किया। उन्हें डर था कि स्थानीय और प्रांतीय स्तर पर जातिवाद अधिक शक्तिशाली है तथा इस स्तर पर सरकार उच्च जाति के दबाव में निम्न जाति के हितों की रक्षा नहीं कर सकती है। क्योंकि राष्ट्रीय सरकार इन दबावों से कम प्रभावित होती है, इसलिये वह निचली जाति का संरक्षण सुनिश्चित करेगी।

    डॉ.अंबेडकर एक नायक के रुप में दलितों,पिछड़ों और वंचितों के प्रेरणा स्रोत है। बचपन में छुआछूत का शिकार होने के कारण उनके जीवन की धारा पूरी तरह से परिवर्तित हो गई, जिससे उन्होंने अपने आपको उस समय के उच्चतम शिक्षित भारतीय नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया और भारत के संविधान को आकार देने के लिए अपने जीवन को देश के प्रति समर्पित कर दिया।

    गाँधी व कांग्रेस की कटु आलोचना के बावजूद आम्बेडकर की प्रतिष्ठा एक अद्वितीय विद्वान और विधिवेत्ता की थी। जिसके कारण जबए 15 अगस्त 1947 को भारत को स्वतंत्रता मिलने के बादए कांग्रेस के नेतृत्व वाली नई सरकार अस्तित्व में आई तो उसने आम्बेडकर को देश के पहले क़ानून एवं न्याय मंत्री के रूप में सेवा करने के लिए आमंत्रित कियाए जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।

    डॉ.अंबेडकर दूरदर्शी थे,उन्होंने लोकतंत्र के खतरों को पहले ही भांप लिया था। इसीलिए उन्होंने लोकतंत्र को जीवन पद्धति के रूप में महत्त्व दिया। अर्थात् लोकतंत्र का महत्त्व केवल राजनीतिक क्षेत्र में ही नहीं बल्कि व्यक्तिगत, सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में भी है। इसके लिये लोकतंत्र को समाज की सामाजिक परिस्थितियों में व्यापक बदलाव लाना होगा अन्यथा राजनीतिक लोकतंत्र यानी एक आदमी, एक वोट, की विचारधारा गायब हो जाएगी। केवल एक लोकतांत्रिक समाज में ही लोकतांत्रिक सरकार की स्थापना से उत्पन्न हो सकती है, इसलिये जब तक भारतीय समाज में जाति की बाधाएँ मौजूद रहेंगी, वास्तविक लोकतंत्र की स्थापना नहीं हो सकती। इसलिये उन्होंने लोकतंत्र और सामाजिक लोकतंत्र सुनिश्चित करने के लिये लोकतंत्र के आधार के रूप में बंधुत्व और समानता की भावना पर ध्यान केंद्रित किया।

    वह जनतांत्रिक समाज व्यवस्था के पक्षधर थे,क्योंकि उनका मानना था ऐसी स्थिति में धर्म मानव जीवन का मार्गदर्शक बन सकता है।

    डॉ.अंबेडकर द्वारा तैयार किए गए संविधान के पाठ में व्यक्तिगत नागरिकों के लिए नागरिक स्वतंत्रता की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए संवैधानिक गारंटी और सुरक्षा प्रदान की गई है,जिसमें धर्म की आजादी, छुआछूत को खत्म करना और भेदभाव के सभी रूपों का उल्लंघन करना शामिल है। उन्होंने महिलाओं के लिए व्यापक आर्थिक और सामाजिक अधिकारों के लिए तर्क दिया और अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों के लिए नागरिक सेवाओं,स्कूलों और कॉलेजों में नौकरियों के आरक्षण की व्यवस्था शुरू करने के लिए असेंबली का समर्थन प्राप्त किया।

    सामाजिक सुधारों में परिवार सुधार और धार्मिक सुधार को शामिल किया गया। पारिवारिक सुधारों में बाल विवाह जैसी प्रथाओं को हटाना शामिल था। यह महिलाओं के सशक्तीकरण का पुरज़ोर समर्थन करता है। यह महिलाओं के लिये संपत्ति के अधिकारों का समर्थन करता है जिसे उन्होंने हिंदू कोड बिल के माध्यम से हल किया था।

    सामाजिक आयाम के साथ-साथ अंबेडकर ने आर्थिक आयाम पर भी ध्यान केंद्रित किया। वे उदारवाद और संसदीय लोकतंत्र से प्रभावित थे तथा उन्होंने इसे भी सीमित पाया। उनके अनुसार,संसदीय लोकतंत्र ने सामाजिक और आर्थिक असमानता को नज़रअंदाज किया। यह केवल स्वतंत्रता पर केंद्रित होती है,जबकि लोकतंत्र में स्वतंत्रता और समानता दोनों की व्यवस्था सुनिश्चित करना ज़रुरी है।

    आज भारत जातिवाद,कट्टर सांप्रदायिकता,अलगाववाद,लैंगिग असमानता जैसी अनेक सामाजिक,आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन चुनौतियों का सामना हम अंबेडकर की भावनाओं में निहित समाधानों से ही खोज सकते हैं।

    इस प्रकार सामाजिक,राजनीतिक सुधारक के रूप में डॉ अंबेडकर का आधुनिक भारत पर गहरा असर हुआ है। स्वतंत्रता के बाद भारत में उनके सामाजिक, राजनैतिक विचारों को पूरे राजनीतिक क्षेत्र में सम्मानित किया जाता है। उनकी पहल ने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित किया है और आज जिस तरह से भारत सामाजिक, आर्थिक नीतियों और कानूनी प्रोत्साहनों के माध्यम से सामाजिक आर्थिक नीतियों, शिक्षा और सकारात्मक कार्रवाई में दिख रहा है,उसमें डॉ.भीमराव अंबेडकर की बहुत बड़ी भूमिका है।

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