Kanpur:-उच्च शिक्षा हासिल करने के नए आवसर दे रहा है C-DOE,हाशिये के वर्गों के सपनों को दे रहा नई उड़ान दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र

शिक्षा केवल ज्ञान हासिल करने का माध्यम नहीं है,बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन, आर्थिक रूप से मजबूत बनने और मानवीय गरिमा की स्थापना का सबसे बड़ा साधन है। भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में करोड़ों ऐसे लोग हैं जिनकी शिक्षा विभिन्न सामाजिक,आर्थिक,पारिवारिक अथवा व्यावसायिक या अन्य कारणों से अधूरी रह जाती है। कोई नौकरी के कारण नियमित कक्षाओं में उपस्थित नहीं हो पाता,कोई आर्थिक परिस्थितियों के कारण उच्च शिक्षा से वंचित रह जाता है, तो कोई ग्रामीण अथवा दूरस्थ क्षेत्र में रहने के कारण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक नहीं पहुँच पाता। ऐसे सभी वर्गों के लिए छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय  कानपुर का द्रोणाचार्य सेंटर फॉर डिस्टेंस एंड ऑनलाइन एजुकेशन (C-DOE) नए अवसर फलब्ध करा रहा है।

  • सर्वसुलभ और समावेशी शिक्षा के लिए सीएसजेएमयू कानपुर का अनोखा प्रयास।
  • एनईपी के प्राइवेट माध्यम के डिग्री कोर्स हुए बंद।
  • कामकाजी,प्रफेसनल्स,उच्च शिक्षा से वंचित लोगों के लिए C-DOE ने खोले नए द्वार।
  • इंटर में मैथ के बिना भी कर सकते हैं बीसीए।
  • सेंटर फॉर डिस्टेंस एंड ऑनलाइन एजुकेशन में जुलाई 2026-27 सत्र में प्रवेश जारी।
  • प्रवेश लेने की आखिरी तारीख 13 अक्टूबर 2026।
  • प्रवेश लेने के लिए विजिट करें https://csjmu.ac.in/decode।

विश्वविद्यालय का सेंटर फॉर डिस्टेंस एंड ऑनलाइन एजुकेशन(C-DOE) उन छात्र-छात्राओं कामकाजी युवाओं,महिलाओं,सैनिकों,ग्रामीण युवाओं,श्रमिकों तथा समाज के वंचित एवं हाशिये पर खड़े वर्गों तक उच्च शिक्षा पहुँचाने का काम कर रहा है,जो किसी कारणवश पारंपरिक शिक्षा प्रणाली का लाभ नहीं उठा सके।

C-DOE का मूल दर्शन-शिक्षा सबके लिए

देश की एक बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। जहाँ उच्च शिक्षा संस्थानों तक पहुँच बहुत कठिन होती है। ऐसे में C-DOE का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं,बल्कि प्रत्येक नागरिक को उसकी परिस्थितियों के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराना है। चाहे कोई व्यक्ति किसी फैक्ट्री में कार्यरत हो,सरकारी अथवा निजी नौकरी कर रहा हो,स्वरोजगार से जुड़ा हो,रेहड़ी-पटरी लगाता हो,दैनिक मजदूरी करता हो,गृहिणी हो या फिर किसी दूरस्थ गाँव में रह रहा हो C-DOE के माध्यम से वह अपनी शिक्षा पुनःप्रारंभ कर सकता है और अपने अधूरे सपनों को साकार कर सकता है। आज उच्च शिक्षा तक समान और सबकी पहुँच सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है। C-DOE इसी आवश्यकता को पूरा करते हुए शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का प्रयास कर रहा है।

परंपरागत और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का व्यापक विकल्प

C-DOE के तहत अनेक स्नातक (UG) एवं स्नातकोत्तर (PG) स्तर के परंपरागत तथा व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इनमें कला,वाणिज्य,प्रबंधन,कंप्यूटर अनुप्रयोग एवं अन्य विषयों से संबंधित कार्यक्रम सम्मिलित हैं। इसमें खास तौर पर इंटर में मैथ्स के बिना भी बीसीए करने का विकल्प मौजूद है।

C-DOE के तहत प्रमुख पाठ्यक्रम

* बी.ए.(BA)

* बी.कॉम.(B.Com.)

* बी.बी.ए.(BBA)

* बी.सी.ए.(BCA)

* एम.ए.(MA)

* एम.कॉम.(M.Com.)

* एम.बी.ए.(MBA)

* एम.सी.ए.(MCA)

इन सभी पाठ्यक्रमों की विशेषता यह है कि इसमे शामिल होने वाले विद्यार्थी अपने कार्य के साथ-साथ अध्ययन भी जारी रख सकते हैं। डिजिटल शिक्षण सामग्री, ऑनलाइन कक्षाएँ,अध्ययन सहयोग,लचीली परीक्षा व्यवस्था तथा तकनीक आधारित व्यवस्था शिक्षार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराती है।

ज्ञान के साथ कौशल विकास पर भी विशेष बल

नई शिक्षा नीति(NEP 2020) के अनुरूप C-DOE केवल डिग्री आधारित शिक्षा तक सीमित नहीं है,बल्कि विद्यार्थियों के कौशल विकास, रोजगारपरक दक्षताओं और व्यक्तित्व निर्माण पर भी विशेष ध्यान देता है। इसकी खास बात यह भी है कि पहले जो छात्र प्राइवेट परीक्षाएं देकर डिग्री हासिल करते थे उनके लिए एनईपी के बाद प्राइवेट परीक्षा के दरवाजे बंद हो गए। ऐसे सभी छात्र जो प्राइवेट परीक्षा देकर डिग्री हासिल करना चाहते हैं वह भी C-DOE के जरिए फिर से न केवल पढ़ाई जारी रख सकते हैं बल्कि परीक्षा देकर डिग्री हालिस करने का सपना भी पूरा कर सकते हैं।

आज का युग प्रतिस्पर्धा का युग है। इसमें केवल शैक्षणिक योग्यता ही पर्याप्त नहीं मानी जाती। उद्योग जगत और समाज ऐसे युवाओं की अपेक्षा करता है जिनमें व्यावहारिक कौशल,तकनीकी दक्षता और समस्या समाधान की क्षमता हो। इसी दृष्टि से C-DOE के विभिन्न कार्यक्रम विद्यार्थियों को आधुनिक कार्यस्थलों की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं। कई बार प्रमोशन के लिए भी अतिरिक्त योग्यता की जरूरत होती है। ऐसे मामलों में भी अतिरिक्त योग्यता C-DOE के जरिए हासिल की जा सकती है।

महिलाओं और वंचित वर्गों के लिए वरदान

ग्रामीण एवं अर्धशहरी क्षेत्रों में अनेक महिलाएँ पारिवारिक दायित्वों के कारण नियमित महाविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त नहीं कर पातीं। C-DOE उनके लिए घर बैठे उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग,अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग,अल्पसंख्यक समुदाय तथा समाज के अन्य वंचित वर्गों के लिए भी यह एक प्रभावी मंच सिद्ध हो रहा है। शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान प्राप्त करने की दिशा में यह पहल अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सैनिकों और उनके परिवारों के लिए ऐतिहासिक पहल

C-DOE की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में से एक भारतीय सेना के साथ किया गया ऐतिहासिक समझौता (MoU) है।छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर और सिख लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंटल सेंटर,फतेहगढ़ के मध्य समझौते के माध्यम से सेना के जवानों,अग्निवीरों तथा उनके आश्रितों को उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

इस पहल के अंतर्गत सैनिकों और उनके परिवारों को विशेष शैक्षणिक सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। साथ ही शुल्क में विशेष रियायतें भी उपलब्ध कराई जा रही हैं,जिससे राष्ट्र की सेवा में समर्पित सैनिक अपने शैक्षणिक और व्यावसायिक विकास को भी आगे बढ़ा सकें।

C-DOE की हालिया उपलब्धियाँ

पिछले सालों में C-DOE ने अनेक उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं

* भारतीय सेना के साथ महत्वपूर्ण शैक्षणिक सहयोग स्थापित।

* सैकड़ों सैनिकों और उनके आश्रितों का नामांकन।

* ऑनलाइन एवं दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रमों में निरंतर वृद्धि।

* आधुनिक डिजिटल शिक्षण व्यवस्था का विकास।

* दूरस्थ क्षेत्रों तक शिक्षण सेवाओं का विस्तार।

* शिक्षार्थी सहायता तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम।

* सामाजिक समावेशन और शिक्षा की पहुँच बढ़ाने हेतु विशेष अभियान।

इन उपलब्धियों ने C-DOE को उत्तर प्रदेश ही नहीं,बल्कि देश के प्रमुख दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्रों में स्थान दिलाया है।

कुलपति प्रो.विनय कुमार पाठक के नेतृत्व में नई दिशा

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक के नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने शिक्षा के क्षेत्र में अनेक नवाचार किए हैं। C-DOE की स्थापना और उसका विस्तार इसी दूरदर्शी सोच का परिणाम है।

कुलपति महोदय का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि उच्च शिक्षा केवल महानगरों या आर्थिक रूप से सक्षम वर्ग तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचे। यही कारण है कि विश्वविद्यालय ने तकनीक आधारित शिक्षा,दूरस्थ शिक्षा और ऑनलाइन शिक्षण को सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ जोड़ते हुए नई संभावनाएँ विकसित की हैं।

विकसित भारत की ओर एक महत्वपूर्ण कदम आज जब देश “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की ओर अग्रसर है,तब समावेशी और सुलभ शिक्षा की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। C-DOE यह सुनिश्चित कर रहा है कि किसी भी नागरिक की प्रगति केवल इसलिए बाधित न हो क्योंकि वह किसी गाँव में रहता है,आर्थिक रूप से कमजोर है या नौकरी के कारण नियमित शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकता। यह केंद्र शिक्षा को एक विशेषाधिकार नहीं,बल्कि एक सार्वभौमिक अवसर के रूप में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक ज्ञान,कौशल और अवसर पहुँचाने का यह प्रयास निश्चित रूप से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रहा है। आने वाले वर्षों में यह पहल हजारों ऐसे युवाओं,महिलाओं,श्रमिकों,सैनिकों और ग्रामीण नागरिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनेगी,जो अपने सपनों को शिक्षा के सहारे नई उड़ान देना चाहते हैं। यदि आप भी C-DOE में जुलाई 2026-27 सत्र प्रवेश लेना चाहते हैं तो https://csjmu.ac.in/decode पर लागिन करिए। याद रखिए प्रवेश की आखिरी तारीख 13 अक्टूबर 2026 है।