National:-उत्तराखंड के मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने ओडिशा के राज्यपाल से की भेंट,दोनों राज्यों के बीच विचारों,अनुभवों और विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर हुई चर्चा

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संवाद और राष्ट्रीय एकता की परंपरा का एक सजीव उदाहरण उस समय देखने को मिला जब उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज भुवनेश्वर स्थित लोक भवन में ओडिशा के राज्यपाल डॉ.हरि बाबू कंभमपति से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्यों के बीच विचारों,अनुभवों और विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सार्थक चर्चा हुई।

  • लोकभवन भुवनेश्वर में संवाद का सेतु:ओडिशा-उत्तराखंड के बीच विकास,संस्कृति और राष्ट्रीय एकता पर सार्थक विमर्श।
  • उड़ीसा के राज्यपाल डॉ.कंभमपति ने कहा कि ओडिशा और उत्तराखंड दोनों राज्यों में धार्मिक आस्था,सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन की अपार संभावनाएं समान रूप से विद्यमान हैं।
  • उड़ीसा के राज्यपाल डॉ.कंभमपति ने कहा-उड़ीसा के आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसरों ने जीवन स्तर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
  • यह 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय,भारत सरकार के अंतर्गत प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी),देहरादून द्वारा आयोजित प्रेस टूर पर है। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सहायक निदेशक संजीव कुमार सुन्द्रियाल कर रहे हैं।

बैठक के दौरान पत्रकारों ने उत्तराखंड की विशिष्ट भौगोलिक,सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान पर प्रकाश डाला। देवभूमि उत्तराखंड अपने प्रमुख तीर्थ स्थलों,पर्यटन और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। राज्यपाल ने इन विशेषताओं को स्वीकार करते हुए कहा कि ओडिशा और उत्तराखंड के बीच आध्यात्मिक विरासत और पर्यटन की दृष्टि से कई समानताएँ हैं। उन्होंने कहा कि पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर और उत्तराखंड का केदारनाथ मंदिर भारतीय आस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, जो देश की आध्यात्मिक एकता को दर्शाते हैं।

ओडिशा के विकास की चर्चा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि राज्य आर्थिक, सामाजिक और अवसंरचनात्मक क्षेत्रों में निरंतर प्रगति कर रहा है और एक समृद्ध राज्य के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की कल्याणकारी योजनाएँ प्रभावी रूप से लोगों तक पहुँच रही हैं। वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से स्थिति अब काफी हद तक नियंत्रित हो चुकी है,जिससे दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास की पहुँच सुनिश्चित हुई है। विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

औद्योगिक विकास पर बोलते हुए राज्यपाल ने कहा कि ओडिशा खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और एल्यूमिनियम सहित अन्य मूलभूत उद्योगों में निवेश से आर्थिक विकास को गति मिली है।

अवसंरचना के क्षेत्र में प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने विश्वस्तरीय सड़क नेटवर्क,रेलवे कॉरिडोर और बंदरगाहों के विस्तार की जानकारी दी, जिसे केंद्र सरकार की बढ़ी हुई बजटीय सहायता का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने सेमीकंडक्टर और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में हो रहे निवेश का भी उल्लेख किया और कहा कि ओडिशा एक उभरते हुए आईटी और शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। राज्यपाल ने राज्य के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों की सराहना करते हुए कहा कि ये संस्थान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध और नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।

उत्तराखंड से अपने व्यक्तिगत जुड़ाव का उल्लेख करते हुए डॉ.कंभमपति ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2012–13 के दौरान राज्य का दौरा किया था,जहाँ उन्होंने विकास मॉडल को निकट से देखा। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में उत्तराखंड के लिए घोषित औद्योगिक पैकेज का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे रुद्रपुर जैसे क्षेत्रों में व्यापक रोजगार के अवसर सृजित हुए।

उन्होंने देश में तीव्र गति से हो रहे अवसंरचनात्मक विकास की सराहना करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी के योगदान का विशेष उल्लेख किया। इस संदर्भ में उन्होंने दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी और पर्यटन, व्यापार तथा कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा।

राज्यों के बीच ऐसे संवादों के महत्व पर जोर देते हुए राज्यपाल ने कहा कि अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान से देश के समग्र विकास को गति मिलती है। उन्होंने मीडिया की भूमिका को समाज का दर्पण बताते हुए पत्रकारों से तथ्यात्मक,सकारात्मक और जिम्मेदार पत्रकारिता को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

अपने समापन वक्तव्य में राज्यपाल ने कहा कि ओडिशा अब पिछड़ेपन की पूर्व धारणा से आगे बढ़कर विकास,समृद्धि और नए अवसरों की दिशा में एक नई कहानी लिख रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के संवाद आगे भी जारी रहेंगे और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को और सशक्त करेंगे।

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