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कवि निहाल सिंह की कविताएं
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गॉंव की सर्दी
सरसों के फूलों
पर बिखरें है
म्हीन ओस के
मोतियों से
बहता नीर
कोहरे की ओट
में लिपटी खेतों की
टेढ़ी-मेढ़ी मेड़ो
पर जमी बर्फ
की टुकड़ियां
घर के ऑंगन में
जलते हारों...
सफ़र हमारे,’जिन्दगी एक सफ़रनामा है’
मेरी अपनी समझ तो यह कि जिन्दगी एक यात्रा ही है और हम यात्री, यात्रा वृत्तांत उसका आँखों देखा हाल। कबीर याद आते हैं...













