
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह(से नि)ने मंगलवार गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय,पंतनगर के 37वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। इस अवसर पर कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी एवं सांसद नैनीताल अजय भट्ट विशिष्ट अतिथि एवं कुलसचिव डॉ.दीपा विनय मंचासीन रही।

इस अवसर पर राज्यपाल द्वारा गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में विद्यार्थी बाजार का भव्य उद्घाटन किया गया। उद्घाटन के पश्चात अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि इस प्रकार के विद्यार्थी बाजार विद्यार्थियों में उद्यमिता की भावना को प्रोत्साहित करते हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की गुणवत्ता एवं नवाचार की सराहना की।
मुख्य अतिथि राज्यपाल एवं कुलाधिपति राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह(से नि)ने अपने संबोधन में 37वें दीक्षांत समारोह के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे आध्यात्मिकता और पूर्णता का प्रतीक बताया। उन्होंने ‘नए युग’ की अवधारणा पर बल देते हुए विकसित भारत,आत्मनिर्भर भारत और विश्व गुरु बनने के लक्ष्य को विद्यार्थियों के सामने रखा। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,क्वांटम कंप्यूटिंग,रोबोटिक्स,साइबर टेक्नोलॉजी और स्पेस साइंस जैसी आधुनिक तकनीकों ने दुनिया को तेजी से बदल दिया है। ऐसे समय में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि वे विश्व भर में अपनी पहचान बना रहे हैं और हरित क्रांति जैसे ऐतिहासिक कार्यों में योगदान दे चुके हैं। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय द्वारा शहद,मिलेट्स(श्री अन्न)और अरोमा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की और इसे स्वास्थ्य व कृषि के लिए महत्वपूर्ण बताया। कोविड-19 महामारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने संतुलित जीवन शैली और पोषण के महत्व पर भी जोर दिया।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वे अब केवल डिग्रीधारी नहीं,बल्कि जिम्मेदार नागरिक और भावी नेता हैं। उन्होंने युवाओं से नौकरी खोजने के बजाय रोजगार सृजनकर्ता बनने और स्टार्टअप,एग्री-बिजनेस तथा फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने का आह्वान किया। साथ ही ‘लैब से लैंड’ और ‘फाइल से फील्ड’ की अवधारणा को अपनाने पर जोर दिया। समारोह में कुल 1,395 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई,जबकि 36 मेधावी छात्रों को गोल्ड,सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल से सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने इस उपलब्धि को विद्यार्थियों,अभिभावकों और शिक्षकों के सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ का संदेश देते हुए विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय को भारतीय कृषि के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बताते हुए कहा कि यही वह पावन भूमि है,जिसने हरित क्रांति को नई दिशा दी और देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा विकसित उन्नत फसलों-पंत धान,पंत गेहूँ,पंत मक्का,पंत सरसों और पंत सोयाबीन का उल्लेख करते हुए कहा कि ये आज भी देशभर के किसानों के लिए विश्वास का प्रतीक हैं। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार की किसान-हितैषी नीतियों का जिक्र करते हुए कहा कि अब प्रयास यह है कि प्रयोगशालाओं में विकसित ज्ञान सीधे खेतों तक पहुँचे।
उन्होंने प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व की सराहना करते हुए बताया कि किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से करोड़ों किसानों को आर्थिक सहायता मिल रही है। साथ ही उत्तराखण्ड सरकार की विभिन्न योजनाओं-मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना,फल प्रोत्साहन योजना,जैविक खेती योजना और सूक्ष्म सिंचाई योजना का भी उल्लेख किया।
कुलपति डॉ.मनमोहन सिंह चौहान ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि विश्वविद्यालय देश में हरित क्रांति की ऐतिहासिक भूमि का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक नॉर्मन बोरलॉग ने भी इसे हरित क्रांति की जन्मस्थली के रूप में सम्मानित किया है। उन्होंने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा तीन बार ‘सरदार पटेल आउटस्टैंडिंग इंस्टीट्यूशन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया जा चुका है। पिछले 66 वर्षों में संस्थान ने कृषि,पशुपालन,दुग्ध उत्पादन,चिकित्सा और मत्स्य पालन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उन्होंने बताया कि अब तक 46,643 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की जा चुकी है और 361 उन्नत कृषि तकनीकों का विकास किया गया है। वर्ष 2025 में विश्वविद्यालय ने क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग में 209वाँ स्थान प्राप्त किया। फरवरी 2025 में आयोजित 17वीं एग्रीकल्चरल साइंस कांग्रेस में 4700 से अधिक वैज्ञानिकों ने भाग लिया,जिसमें 16 देशों के 90 वैज्ञानिक शामिल थे। विश्वविद्यालय को वर्ष 2025-26 में आईसीएआर से लगभग 4.5 करोड़ रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ है,जिसका उपयोग किसानों के प्रशिक्षण और छात्रवृत्तियों में किया जा रहा है। विश्वविद्यालय में वर्तमान में 4,882 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
उन्होंने बताया कि शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में 324 परियोजनाएं संचालित हैं, जिनकी कुल लागत लगभग 83 करोड़ रुपये है। इस दौरान 348 शोध पत्र प्रकाशित किए गए और 16 पेटेंट के लिए आवेदन किए गए,जिनमें से 9 को स्वीकृति मिल चुकी है। कृषि विस्तार के तहत विश्वविद्यालय ने दो बड़े किसान मेलों का आयोजन किया,जिनमें 50,000 से अधिक किसानों ने भाग लिया। साथ ही 7,000 क्विंटल बीज वितरित किए गए और 852 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। उन्होंने बताया कि 53 प्रकार की छात्रवृत्तियां प्रदान की गई,जिनसे 1,693 विद्यार्थी लाभान्वित हुए। दीक्षांत समारोह में कुल 1,395 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई,जिनमें 731 छात्र और 664 छात्राएं शामिल हैं। कुलसचिव,डॉ.दीपा विनय ने समारोह का संचालन किया एवं अंत में धन्यवाद दिया।
इस अवसर पर वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय,देहरादून की कुलपति डॉ.तृप्ता ठाकुर,सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय,अल्मोड़ा के कुलपति प्रो.सतपाल सिंह,उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय,हल्द्वानी के कुलपति प्रो.नवीन चंद्र लोहानी,कुमाऊं विश्वविद्यालय,नैनीताल के कुलपति प्रो.दीवान सिंह रावत,निदेशक शोध डॉ.एस.के.वर्मा,उत्तराखण्ड की लोक गायिका पद्मश्री डॉ.माधुरी बड़थ्वाल,विश्वविद्यालय की प्रबन्ध परिषद एवं विद्वत परिषद् के सदस्यों के साथ-साथ विश्वविद्यालय के महाविद्यालयों के संकाय सदस्य,अधिकारी,कर्मचारी एवं विद्यार्थी तथा जिला प्रशासन के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।
















