
गुरुवार को लोक भवन में उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति,प्रकृति प्रेम एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक लोकपर्व ‘हरेला’ को पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने हरेला पर्व के अवसर पर लोक भवन स्थित राजप्रज्ञेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि,शांति एवं खुशहाली की कामना की। इसके उपरांत राज्यपाल, प्रथम महिला श्रीमती गुरमीत कौर,विधि परामर्शी श्री कौशल किशोर शुक्ल,अपर सचिव रीना जोशी सहित लोक भवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

हरेला पर्व के अवसर पर सांस्कृतिक दल द्वारा पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ लोक संस्कृति पर आधारित मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में हरेला के मांगलिक गीत प्रस्तुत कर लोकपर्व की गरिमा और उल्लास को और अधिक बढ़ाया।
प्रदेश एवं देशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड में प्रकृति के प्रति श्रद्धा और संरक्षण की समृद्ध परंपरा रही है। हरेला पर्व प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत,कृषि परंपरा तथा प्रकृति के साथ हमारे गहरे जुड़ाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज के समय में हरेला केवल एक पारंपरिक पर्व नहीं,बल्कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच हरित एवं सतत विकास के लिए सामूहिक जनभागीदारी का सशक्त संदेश भी है।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड अपनी समृद्ध प्राकृतिक संपदा,घने वनों और जैव विविधता के कारण पूरे देश के पर्यावरणीय संतुलन का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी प्रदेश के प्रत्येक नागरिक की है। उन्होंने सभी से अधिकाधिक वृक्षारोपण करने तथा लगाए गए पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रकृति का संरक्षण केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारी भी है।प्रकृति और विकास के बीच संतुलन बनाए रखते हुए ही हम एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।
इस अवसर पर प्रथम महिला गुरमीत कौर,विधि परामर्शी कौशल किशोर शुक्ल,अपर सचिव रीना जोशी,निदेशक उद्यान डॉ.आर के सिंह,संयुक्त निदेशक उद्यान डॉ.रतन कुमार,उद्यान अधिकारी दीपक पुरोहित सहित लोक भवन के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

















