उत्तराखंड में धूमधाम से मनाया गया 72वां गणतंत्र दिवस,राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने परेड मैदान में किया ध्वजारोहण

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गणतंत्र दिवस के मौके पर मंगलवार को परेड मैदान में होने वाले मुख्य आयोजन में राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर महमाहिम राज्यपाल प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी है। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी, 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ था। आज का दिन न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के प्रति हमारे संकल्प को दोहराने का दिन है। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और संविधान के प्रमुख शिल्पी बाबा साहब आम्बेडकर सहित सभी महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं संविधान निर्माताओं को नमन किया है। देश की सीमाओं की रक्षा तथा आंतरिक सुरक्षा के लिये दिन-रात तैनात रहने वाले सेना एवं सुरक्षा बलों के जवानों को भी प्रणाम किया है।

उन्होंने कहा कि पिछला एक वर्ष कोरोना महामारी के कारण हम सभी के लिये बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। इस महामारी के विरूद्ध उत्तराखण्ड सहित पूरे देश ने एक अद्भुत आत्म विश्वास और संकल्प का प्रदर्शन किया। राज्यपाल श्रीमती मौर्य ने अपने संदेश में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद दिया, जिन्होंने संकट के समय में अग्रिम मोर्चे पर रहकर देश का नेतृत्व किया। उन्होंने देशभर में सभी वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, नर्सों, स्वास्थ्य एवं सफाई कर्मियों, पुलिस-प्रशासन सहित विभिन्न समाज सेवी संस्थाओं को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह हर्ष का विषय है कि 16 जनवरी, से विश्व का सबसे बड़ा कोविड टीकाकरण कार्यक्रम प्रारंभ हो चुका है।

कोविड के प्रति अभी पूरी सावधानी रखनी होगी

राज्यपाल ने कहा है कि ‘‘उत्तराखण्ड में भी कोविड के मामलों में बहुत कमी आयी है, लेकिन हमें अभी भी पूरी सावधानी रखनी आवश्यक है। टीका लगने के बाद भी हम सभी को कोविड से बचाव संबंधी सभी नियमों का पूरा पालन करते रहना है।’’

राज्य में सभी वर्गों और समुदायों को आगे बढ़ने का समान अवसर मिले

राज्यपाल ने कहा है कि ‘‘उत्तराखण्ड के समग्र विकास के लिये राज्य एवं केन्द्र सरकार द्वारा कई कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। राज्य की खुशहाली के लिये आवश्यक है कि यहाँ की महिलाओं, युवाओं, किसानों, व्यापारियों सहित सभी वर्गों और समुदायां के लोगों को आगे बढ़ने के समान अवसर मिले।’’ महिलाओं के आर्थिक विकास एवं समग्र कल्याण हेतु रोजगार एवं स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाये जाने महत्वपूर्ण है। महिलाएँ इस प्रदेश के आर्थिक-सामाजिक विकास की धुरी है। उनका अच्छा स्वास्थ्य, उनके तथा उनके परिवार हेतु पोषणयुक्त भोजन और उनका आर्थिक सशक्तीकरण सरकार की प्राथमिकता में है।

स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्वरोजगार के अवसर सृजित हो रहे

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं एवं युवाओं के लिये ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रोथ सेंटर खोले जा रहे हैं, जहाँ स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्वरोजगार के अवसर सृजित हो रहे है। आत्म निर्भर भारत को सफल बनाने के लिये एक आत्म निर्भर उत्तराखण्ड का निर्माण भी आवश्यक है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ प्रदेश के किसानों को मिल रहा है। पं.दीन दयाल उपाध्याय सहकारिता कृषि कल्याण योजना के अन्तर्गत किसानों तथा स्वयं सहायता समूहों को बिना ब्याज का लोन दिया जा रहा है। पर्यटन, योग तथा आयुष उत्तराखण्ड की पहचान है। अपनी पारंपरिक पहचान को आधुनिक तौर-तरीकों से मिलाकर हमें इन क्षेत्रों को आर्थिक विकास का माध्यम बनाना होगा। राज्य में पर्यटन, जैविक कृषि, योग, आयुष इन सभी को एकसाथ रखते हुए एकीकृत आदर्श कृषि-पर्यटक ग्रामों की स्थापना करनी आवश्यक है। इससे न सिर्फ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि देश-विदेश से आने वाले टूरिस्ट को विविधता भी देखने को मिलेगी।

‘‘सौभाग्य योजना’’ लोगो के घरों में उजाला ला रही है

राज्यपाल ने कहा है कि प्रदेश की ग्रामीण जनता को बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य की मूलभूत सुविधाएँ आसानी से उपलब्ध होनी चाहिये। ‘‘सौभाग्य योजना’’ लोगो के घरों में उजाला ला रही है। ‘‘हर घर को नल से जल योजना’’ में अगले वर्ष की समाप्ति तक हर ग्रामीण घर को पानी का कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 1 रुपये में पानी का कनेक्शन दिया जा रहा है। कोविड-19 की चुनौती के मध्य राज्य में हेल्थ सिस्टम को मजबूत बनाने के लिये भी कई कार्य किये गये। हरिद्वार कुम्भ के लिये शासन के स्तर पर तैयारियाँ की जा रही हैं। साधु-संतों के आशीर्वाद तथा स्थानीय निवासियों के सहयोग से कुम्भ का सफल आयोजन हमारी प्राथमिकता है।

भारत एक बार पुनः विश्व गुरू की पदवी पर आसीन होगा

उन्होंने कहा कि हम नये भारत के निर्माण के साक्षी बन रहे हैं। अब वह दिन दूर नही, जब भारत एक बार पुनः विश्व गुरू की पदवी पर आसीन होगा। कोविड-19 महामारी से सफलतापूर्वक लड़कर और फिर अपनी स्वयं की वैक्सीन बनाकर भारत वर्ष ने एक बार पुनः अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है। अब आवश्यकता है कि हमारी युवा पीढ़ी नई प्रगतिशील सोच के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और मूल्यों को आत्मसात करते हुए नव भारत के निर्माण हेतु अपना शत-प्रतिशत योगदान दे।