Uttarakhand:-राज्यपाल गुरमीत सिंह ने ली उत्तराखण्ड के स्ववित्तपोषित निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के प्रथम चरण की बैठक

0
5

राज्यपाल एवं कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने गुरुवार को लोक भवन में आयोजित उत्तराखण्ड के स्ववित्तपोषित (निजी) विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के प्रथम चरण की बैठक ली,बैठक में 13 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने प्रतिभाग किया।

  • 21वीं सदी की चुनौतियों के अनुरूप युवाओं को एआई सक्षम,उद्योगोन्मुख एवं राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार करें विश्वविद्यालय:-राज्यपाल।

बैठक में राज्यपाल ने कुलपतियों से कहा कि युवाओं को केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए,बल्कि उन्हें रोजगार,उद्योग,समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए पूर्णतःतैयार करना विश्वविद्यालयों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से निकलने वाला प्रत्येक विद्यार्थी एआई सक्षम,उद्योगोन्मुख,कौशलयुक्त तथा सामाजिक उत्तरदायित्वों के प्रति जागरूक होना चाहिए,ताकि वह विकसित भारत-2047,आत्मनिर्भर भारत और भारत को विश्व गुरु बनाने के संकल्प में सक्रिय योगदान दे सके।

राज्यपाल ने अनुसंधान,नवाचार,पेटेंट और बौद्धिक संपदा अधिकारों पर विशेष बल देते हुए कहा कि आज केवल शोध करना पर्याप्त नहीं है,बल्कि शोध को पेटेंट,प्रकाशन और समाजोपयोगी तकनीक में परिवर्तित करना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को डेटा सुरक्षा,साइबर सुरक्षा और उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में सक्षम मानव संसाधन तैयार करना होगा।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की श्रेष्ठ उपलब्धियों और नवाचारों को साझा करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय जुड़ें तथा अपनी श्रेष्ठ कार्यप्रणालियां,शोध,नवाचार और उपलब्धियां एक-दूसरे के साथ साझा करें,जिससे सभी संस्थानों को प्रेरणा और लाभ मिल सके।

राज्यपाल ने सभी विश्वविद्यालयों से आग्रह किया कि वे राष्ट्र,प्रदेश,समाज और युवाओं के हित से जुड़े कम-से-कम एक महत्वपूर्ण शोध विषय का चयन करें तथा उस पर दीर्घकालिक एवं गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान करें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों के भीतर शोध,नवाचार,प्रयोग,हॉबी और मिशन आधारित कार्य संस्कृति विकसित करनी होगी,ताकि युवा अपनी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगाएं और समाज के लिए उपयोगी कार्यों में योगदान दें।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों द्वारा एआई,क्वांटम तकनीक तथा अन्य अत्याधुनिक क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड इन क्षेत्रों में उत्कृष्टता का केंद्र बन सकता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय व्यवसाय और आर्थिक लाभ से आगे बढ़कर समाज,राष्ट्र और मानवता के हित में कार्य करें।

बैठक के दौरान कुलपतियों द्वारा विश्वविद्यालयों की उपलब्ध्यिों के अलावा अनुसंधान को बढ़ावा देने,पेटेंट संस्कृति विकसित करने,उद्योग-अकादमिक सहयोग,राष्ट्रीय स्तर पर साझा शोध व्यवस्था तथा विश्वविद्यालयों के बीच समन्वय से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

 इस अवसर पर सचिव राज्यपाल रविनाथ रामन,विधि परामर्शी राज्यपाल कौशल किशोर शुक्ल,सचिव उच्च शिक्षा डॉ.बीवीआरसी पुरुषोत्तम,अपर सचिव राज्यपाल रीना जोशी,देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार,यूपीईएस विश्वविद्यालय देहरादून,इक्फाई विश्वविद्यालय देहरादून,आई.एम.एस.यूनिसन विश्वविद्यालय देहरादून,स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय देहरादून,डी.आई.टी.विश्वविद्यालय देहरादून,उत्तरांचल विश्वविद्यालय देहरादून,गुरु राम राय विश्वविद्यालय देहरादून,क्वांटम विश्वविद्यालय रुड़की,रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय देहरादून,सरदार भगवान सिंह विश्वविद्यालय देहरादून,कोर विश्वविद्यालय रुड़की तथा डी.बी.एस.ग्लोबल विश्वविद्यालय देहरादून के कुलपतिगण उपस्थित रहे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here