उत्तराखंड सरकार ने महिलाओं को दिया एक और तोहफा,अब चारा काटने नहीं जाना पड़ेगा जंगल,हिंसक पशुओं और दुर्घटना से होगी जीवन रक्षा

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उत्तराखंड सरकार ने अपनी पिछली कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड की महिलाओं को पति की पैतृक संपत्ति में हिस्सेदार और राजस्व रिकॉर्ड में पति की पैतृक संपत्ति में नाम दर्ज करने के ऐतिहासिक फैसले पर मुहर लगाई थी। इस कड़ी में गुरूवार को एक ऐतिहासिक फैसला और जुड़ गया है।

उत्तराखंड सरकार ने गुरूवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में महिलाओं को एक और सौगात दी है। अब उत्तराखंड की महिलाओं को अपने पशुओं के लिए चार लेने के लिए न तो मीलों पैदल चलना पड़ेगा और ना ही चारे का बोझा ढोना पड़ेगा। त्रिवेंद्र कैबिनेट ने महिलाओं को इस बोझ से निजात दिलाने के अपने संकल्प को मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना को मंजूरी दे कर पूरा कर दिया है। इस योजना के तहत पर्वतीय क्षेत्रों में दूरस्थ ग्रामीण पर्वतीय क्षेत्रों के पशुपालकों को पैक्ड सायलेज, संपूर्ण मिश्रित पशु आहार (टीएमआर) उनके घर तक पहुंचाया जाएगा। सायलेज उत्पादन एवं विपणन संघ लिमिटेड (एसआइएफइडी) इस योजना को संचालित करेगा।

क्या है मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याणकारी योजना

पहाड़ की महिलाओं के जीवन-परिवेश को करीब से देखने और उनके संघर्षों को जानने-समझते हुए। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत हमेशा से पहाड़ कि मातृशक्ति के संघर्षों के साथ खड़े रहते है। इसी संकल्प के साथ मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पहाड़ की महिलाओं के लिए जंगल जाने की मजबूरी समाप्त करने और उनकी सुरक्षा को देखते हुए मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याणकारी योजना  की घोषणा की थी। इस योजना के माध्यम से पशु पालन करने वाली महिलाओं को सस्ते में पशु चारा उपलब्ध कराया जाएगा साथ ही सस्ता  खाद्यान्न योजना की तर्ज पर पशुओं का चारा उपलब्ध कराया जाएगा। इसके तहत 7771 सहकारी केंद्रों पर कम दरों पर चारा बिक्री की व्यवस्था की जाएगी। यह केंद्र तमाम गांवों के संपर्क क्षेत्र में स्थित हैं। ऐसे में महिलाओं को अपने घरों के नजदीक ही हरे चारे की उपलब्धता हो सकेगी और पशुओं के लिए लाभदायक चारा आसानी से उपलब्ध हो सकेगा।

इसी के साथ गुरूवार को हुई कैबिनेट की बैठक में 7 अन्य प्रस्तावों को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी गई

1:- मुख्यमंत्री  घसियारी कल्याण योजना पर कैबिनेट की मंजूरी

2:-संस्कृत शिक्षा विभाग के 57 शिक्षकों को 155 शिक्षकों में समायोजित किया गया

3:- कृषि मंडी में अध्यक्ष एक बार ही नॉमिनेट किया जा सकेगा

4:- वन भूमि पर दी गयी लीज के नवीनीकरण और नई लीज की मंजूरी दी गई

5:- उत्तराखंड पुलिस दूरसंचार अधिनस्थ सेवा नियमावली 2021 कोई संशोधन नहीं 10 साल की गई

6:- उत्तराखंड राज्य कृषि उपज और पशुधन विपणन प्रोत्साहन एवं सुविधा अधिनियम 2020 की धारा 87 में संशोधन

7:- कोविड-19 के उपचार हेतु डेडीकेटेड 600 बेड के अस्पताल जिसमें 50 आईसीयू बेड में सम्मिलित  होने के संबंध में निर्णय लिया गया है।