उत्तराखंड में कोविड में अनाथ हुए बच्चों के लिए सरकार का बड़ा फैसला,21 साल तक इन बच्चों की देखभाल करेगी सरकार

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उत्तराखंड में बुधवार को मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। जिसमें सबसे अहम फैसला रहा है,उत्तराखंड में कोविड-19 में अनाथ हुए बच्चों की देखभाल 21 साल तक राज्य सरकार करेगी। इसी के साथ कोरोना संक्रमण के चलते ठप पड़े पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने और इससे जुड़े लोगों को सहयोग करने के लिए कई निर्णय लिए गए,जिनके बारे शासकीय प्रवक्ता सुबोध उनियाल ने जानकारी दी है

  • कोविड-19 प्रभाव को देखते हुए सामाजिक सुरक्षा के अंतर्गत वात्सल्य योजना को मंजूरी दी गई। यह मार्च 2020 से मार्च 2022 तक लागू रहेगी, इसके अंतर्गत बच्चे के माता-पिता अथवा संरक्षक की मृत्यु होने पर उस बच्चे को 21 वर्ष तक 3000 रुपये प्रति माह, निःशुल्क राशन, शिक्षा इत्यादि की सुविधा दी जाएगी।
  • कोविड-19 के चलते उद्योगों के नुकसान को देखते हुए इसकी भरपाई के लिये 28 करोड़ 99 लाख रुपये पर्यटन व्यवसायियों को दिए जाएगें।
  • केदारनाथ पुनर्निर्माण मास्टर प्लान के अंतर्गत प्रशासनिक भवन कमांड कंट्रोल इत्यादि के लिए भूमि की आवश्यकता को देखते हुए पुराने गढ़वाल विकास निगम के 08 भवनों को ध्वस्तीकरण की अनुमति दी गई है।
  • बदरीनाथ धाम में 100 करोड़ की लागत से बाढ़ नियंत्रण हेतु वेबकास्ट को कार्यदायी संस्था बनाए जाने की अनुमति दी गई है।
  • सोहन सिंह जीना आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान अल्मोड़ा परिसर एवं संबद्ध गोवर्धन तिवारी राजकीय बेस चिकित्सालय अल्मोड़ा के अवशेष चालू कार्य उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम करेगा, जबकि नये कार्य पेयजल निर्माण निगम करेगा।
  • शिल्पकार प्रोत्साहन योजना को 05 वर्ष तक बढ़ाने का निर्णय। इसके अंतर्गत 25 शिल्पकारों को 01 लाख का पुरस्कार दिया जाएगा।
  • पूर्व जिला विकास प्राधिकरण के बाहर ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले बैंक संबंधि ऋण प्राप्त करने के लिए यदि अपना नक्शा पास कराना चाहते हैं तो जिला विकास प्राधिकरण में आवेदन कर सकते हैं,अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों में नक्शा पास कराने की अनिवार्यता नहीं है।
  • उत्तरकाशी के तेखला में न्याय विभाग के आवासीय भवन तथा विश्वनाथ मंदिर के पास लोक निर्माण के आवासीय भवन का भूमि स्थानांतरण न्याय विभाग को करने का निर्णय किया गया।
  • हरिद्वार स्तिथ  होटल अलकनन्दा के पुनर्निर्माण में आरोपित शुल्क 50 लाख 76 हजार 335 रुपये में से लेबर सेस निकालकर 39 लाख 62 हजार 492 रुपये किया गया।
  • राजकीय उद्योग से संबंधित शेड,भूखण्डों के आवंटन,निरस्तीकरण,स्थानांतरण,किराए का अधिकार जिलाधिकारी को दिया गया है।
  • अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रीयल कॉरिडोर में ऊधमसिंह नगर के अंतर्गत समेकित निर्माण समूह बनाए जाने के लिए एक हजार एकड़ की भूमि 150 किमी के अंतर्गत कॉरिडोर के रूप में देने का निर्णया किया गया।
  • उत्तराखण्ड साहुकारी विनियमन नियमावली 2018 को मंजूरी।