कोरोना लॉकडाउन में जय हो ग्रुप बना बेजुबान जानवरों का सहारा

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कहते है जिसका कोई नहीं उसका ऊपर वाला होता है। चाहे मानव हो या बेजुबान जानवर, समाज में इतनी संवेदनशीलता अभी बची है कि किसी को भूखा बिलखता देख संजीदा लोग हरकत में आकर पीड़ित को मदद पहुंचाने में जुट जाते हैं। सामाजिक चेतना की बुलंद आवाज “जय हो” ग्रुप में नगर क्षेत्र में 50 दिनों तक आवारा बेजुबाँ जानवरों को रोटी खिलाने का अभियान चलाया। यह संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण गिना जा रहा है। इसमें सहयोग के लिए ग्रुप ने नगर पालिका अध्यक्ष और जागृति महिला समूह का आभार जताया।

आपको बता दें कि कोविड कर्फ्यू के दौरान बाजार बंद होने से सबसे अधिक दिक्कत बेजुबान जानवरों के सामने आ खड़ी हो गयी थी। जो दीवारों पर लगे पोस्टरों को खाने लगे थे। भूख से बिलखते इन बेजुबान जानवरों का पालिका के कचरा डंपिंग जोन में भारी संख्या में जमावड़ा लगने लगा था। इसी को देखते हुए सामाजिक चेतना की बुलन्द आवाज “जय हो” ग्रुप ने नगर के आवारा पशुओं के लिए महिलाओं की मदद से 300 रोटियां हर रोज बनवाकर और नगर पालिकाध्यक्ष द्वारा चारा की व्यवस्था करते हुए रोजाना ग्रुप के स्वयंसेवियों द्वारा खिलाने का काम किया गया। ग्रुप द्वारा 11 मई से अभियान शुरू किया गया,जो 30 जून तक चलाया गया। महिलाओं ने स्वेच्छा से भागीदारी निभाते हुए हर रोज 300 रोटियां बनाई।

पालिकाध्यक्ष श्रीमती अनुपमा रावत ने चारा की व्यवस्था की,दर्जनों लोगों ने आटा दान किया। नगर  के दर्जनों आवारा मवेशियों को 50 दिनों तक चारा व रोटी खिलाने का अभियान चलाया। ग्रुप के संयोजक सुनील थपलियाल ने बताया कि पिछले साल कोविड लॉकडाउन के दौरान 141 दिन तक ग्रुप ने नगर क्षेत्र में घूम घूम कर रोटी एकत्र कर आवारा पशुओं को खिलाने का काम किया।  इस अभियान में ग्रुप के संयोजक सुनील थपलियाल,मोहित अग्रवाल,अजय रावत,सुशील पीटर,रजत अधिकारी,भगवती रतूड़ी,मदन पैन्यूली,नितिन चौहान,मस्तराम,रुद्राक्ष, सागर, प्रियांशु सहित जागृति महिला समूह की महिलाएं शामिल थी।