दिल्ली में आज से नटसम्राट नाट्य उत्सव का आयोजन,कई लेखक-रंगकर्मी होंगे सम्मानित,डॉ.हरिसुमन बिष्ट को मिलेगा सर्वश्रेष्ठ लेखक का पुरस्कार

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दिल्ली में आज से प्रमुख नाट्य संस्था नटसम्राट थिएटर के तत्ववाधान में 20वें नटसम्राट नाट्य उत्सव का आयोजन शुरू हो रहा है। जहां दर्शक अलग-अलग राज्यों से आए नाटकों का मुफ्त में लुत्फ उठा सकेंगे। नटसम्राट नाट्य उत्सव 4 मार्च को तीन नाटकों का मंचन होगा।

नाट्य उत्सव में शनिवार यानि आज पहला नाटक ‘तीन बंदर’ जिसे प्रभु ने लिखा है। इस नाटक को हरियाणा के कलाकार प्रस्तुत करेंगे। दूसरा नाटक संजय भसीन द्वारा लिखित और विकास शर्मा द्वारा निर्देशित ‘बिरसा मुंडा’ का होगा तीसरा नाटक  डेरियो फ़ो द्वारा लिखित एवं अमिताभ श्रीवास्तव द्वारा रूपांतरण और चादर शेखर शर्मा द्वारा निर्देशित दिल्ली का नाटक ‘चुकायेंगे नहीं’ प्रस्तुत किया जाएगा और चौथा नाटक दिल्ली के कलाकारों द्वारा ही प्रस्तुत होगो ‘चुकाएंगे नहीं’।

 नाट्य उत्सव में 5 मार्च को गिरीश कर्नाड द्वारा लिखित और निर्देशित नाटक ‘बली’, का मंचन किया जाएगा। इसी के साथ शाम को ‘कुछ तुम कहो कुछ हम’ और 12 मार्च को, असम कुशाल डेका द्वारा लिखित और दयाल कृष्ण नाथ द्वारा निर्देशित नाटक ‘कड़वा सच’ नाटकों का मंचन भी किया जाएगा।

डॉक्टर हरिसुमन बिष्ट को इस वर्ष का सर्वश्रेष्ठ लेखक का पुरस्कार

इसी के साथ नटसम्राट अपना 15वां नटसम्राट थियेटर अवार्ड आयोजित करने जा रहा है,जिसमें आठ अलग-अलग विधाओं में रंगकर्मियों-लेखकों को सम्मानित किया जाएगा। नटसम्राट द्वारा इस वर्ष सर्वश्रेष्ठ लेखक का पुरस्कार हरिसुमन बिष्ट,सर्वश्रेष्ठ निर्देशक सत्यब्रत राउत,अभिनेता का पुरस्कार अमित सक्सेना और अभिनेत्री रेखा जौहरी,बैकस्टेज (लाइट्स) का पुरस्कार सौती चक्रवर्ती और आलोचक डॉ.कमलेश को दिया जाएगा।

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के गाँव कुन्हील में 1 जनवरी 1958 को जन्मे डॉ.हरिसुमन बिष्ट का हिंदी साहित्य जगत में एक कथाकार,उपन्यासकार और हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार एवं संवर्द्धन के लिए हिंदी सेवक के रूप में महत्वपूर्ण स्थान है। हरिसुमन बिष्ट की प्रारंभिक शिक्षा गाँव की प्राथमिक पाठशाला में हुई। मानिला इंटर कॉलेज,मानिला से हाईस्कूल एवं इंटर,कुमायूँ विश्वविद्यालय से स्नातक एवं स्नातोकोतर तथा आगरा विश्वविद्यालय,आगरा से पीएच.डी. की शिक्षा प्राप्त की,सामाजिक सरोकारों और संवेदनाओं से भरी अपनी कृतियों से उन्होंने अपना आकाश बनाया है। उनकी रचनाओं का अंग्रेजी सहित कई भारतीय भाषों में अनुवाद हो चुका है, भारतीय भाषाओं के साहित्यकारों के बीच भी उनके उपन्यास और हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार एवं अवदान के लिए काफी चर्चा में रहे हैं। जोहानिसबर्ग एवं भोपाल में आयोजित विश्व हिंदी सम्मेलनों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही है। ताशकंद,समरकंद,इजिप्ट,इण्डोनेशिया, मलेशिया,मास्को,सेंटपीटर्सबर्ग,एथेंस(ग्रीस),वियतनाम,नेपाल तथा सार्क लिटरेचर फेस्टिबल-२०१९ नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मंचों पर व्याख्यान तथा रचनाओं का पाठ करते रहे हैं।

डॉ.हरिसुमन बिष्ट के लेखन की बात करें। उनका सद्य प्रकाशित उपन्यास “बत्तीस राग गाओ मोला” काफी चर्चाओं में है। इसी के साथ उनकी कुछ और रचनाओं की बात करें तो ममता (1980),आसमान झुक रहा है(1990 ), होना पहाड़ (1999) ,आछरी-माछरी(2006,2012),बसेरा(2011),भीतर कई एकांत(2017),अपने अरण्य की ओर (2021),The Saga of a mountain Girl-2017 ( “आछरी-माछरी” का अंग्रेजी अनुवाद)और “आछरी-माछरी” का मराठी अनुवाद (प्रकाशनाधीन),It’s All Solitude within (“भीतर कई एकांत” का अंग्रेजी अनुवाद),कहानी संग्रह,सफ़ेद दाग (1983),आग और अन्य कहानियां (1987),मछरंगा(1995 ),बिजूका (2003),मेले की माया (नव साक्षरों के लिए नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रथम संस्करण 2009 में प्रकाशित),उत्तराखंड की लोक कथाएं (नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित 2011 ),‘हरिसुमन बिष्ट की चुनी हुई कहानियां’( 2018 ) और प्रेक्षागृह एवम अन्य कहानियां(2021),यात्रावृतांत में अंतर्यात्रा(1998),बांग्ला में अनुवाद-आमार ए पोथ(2014),नील के आर पार(2019),नाटक एवं पटकथा आछरी-माछरी,दिसम्बर 1971 का एक दिन,लाटा,प्रेक्षागृह, मछरंगा(रेडियों नाट्य रूपान्तारण प्रसारित),ख़्वाब एक उडाता हुआ परिंदा था,फिल्म ‘राजुला’ की पटकथा और संवाद,अनुवाद-कुमायूनी के सुप्रसिद्ध कवि दीवान सिंह स्योंत्री की पुस्तक “दीवानी विनोद” का हिंदी अनुवाद,सम्पादन-विक्टोरिया तोकारेवा की कहानियां ‘अपनी जबान में कुछ कहो’ का संपादन।

इस उत्सव में रंगमंच के प्रचार-प्रसार के लिए दयाल कृष्णनाथ और भारतरत्न भार्गव को लाइफटाइम अचीवमेंट आवॉर्ड प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान समारोह मुक्तधारा सभागार में आयोजित किया जाएगा।