नयी शिक्षा नीति -2020 नवभारत निर्माण की सशक्त आधारशिला

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डॉ.रमेश पोखरियाल ‘निशंक’

आज से एक साल पहले, भारत सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व में देश ने स्वाधीन भारत के इतिहास में पहली बार भारत केंद्रित शिक्षा नीति की घोषणा की तो न केवल भारत में बल्कि विदेश में भी इस का ऐतिहासिक, परिवर्तनकारी, नवचारयुक्त नीति के रूप में स्वागत किया गया।  हार्वर्ड,कैंब्रिज,मिशिगन समेत विश्व की सौ से अधिक शीर्ष संस्थाओं ने नीति की दूरदर्शिता,लचीलेपन, व्यवहारिकता,वैज्ञानिकता शोधपरकता की सराहना की है। यह संयोग ही था किं 31 मई 2019 का जिस दिन मैंने मंत्रालय में अपना कार्यकाल संभाला उसी दिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मसौदा तैयार करने वाली समिति ने को अपनी रिपोर्ट मुझे सौंपी।

उसके पश्चात  नीति पर व्यापक मंथन विमर्श सुनिश्चित करने की दृष्टिगत मसौदा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 मंत्रालय  की वेबसाइट पर अपलोड की गई और MY GOV  इनोवेट पोर्टल पर सामान्य नागरिक  सहित शिक्षा जगत से जुड़े सभी हितधारकों के विचारों,सुझावों  टिप्पणियों को प्राप्त करने के लिए डाला गया। विश्वविद्यालयों के  कुलपतियों, शिक्षा सचिवों, शिक्षा मंत्रियों, सांसदों,विभिन्न शैक्षिक एवं सामाजिक संगठनों से विभिन्न मंचो पर नीति के मूलभूत स्तंभों- पहुंच, सामर्थ्य, इक्विटी, गुणवत्ता और जवाबदेही का अधिक मजबूत करने हेतु विनम्र निवेदन किया गया ।

मुझे ध्यान है कैंब्रिज के कुलपति ने शिक्षा नीति के विषय में उत्सुकता वश पूछा था किं शिक्षा नीति में क्या नया है तो मैंने कहा किं इस नीति की सबसे बड़ी विशिष्टता यह है किं हमने इस नीति के निर्माण में मुक्त नवाचार के अंतर्गत विश्व के सबसे बड़ा परामर्श के माध्यम से रिकॉर्ड सुझाव लिए। हमने इस बात को सुनिश्चित किया किं देश के सभी क्षेत्रो से हितधारकों के सुझाव लिए जाएँ,इन सुझावों के माध्यम से हमारा प्रयास यह था किं 34 साल बाद बन रही नयी शिक्षा नीति हम सबकी आकांक्षाओं और अपेक्षाओं पर खरा उतरे. हम इस बात से भली भांति अवगत थे किं इस नीति से हमें नव भारत निर्माण की आधारशिला रखनी है ।

मैंने विभिन्न मंचो पर कहा कि नीति निर्माण देश के प्रधान से लेकर प्रधानमंत्री की भूमिका है। यह सुनिश्चित करने का प्रयास हुआ कि इस नीति के माध्यम से देश के अंतिम छोर पर बच्चे के हितों की रक्षा की जा सके। मेरा सदैव से यह मानना रहा है किं किसी भी संगठन, प्रतिष्ठान या सरकार के लिए हितधारक के साथ सार्थक परामर्श उस वक्त अधिक प्रासंगिक हो जाता है जब किसी नीति का निर्माण हो रहा हो, एक ऐसी नीति जिस पर संपूर्ण विश्व की 18  प्रतिशत से अधिक जनसँख्या  का भविष्य निर्भर हो ।

विश्व पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन हम इस बात से कर सकते हैं किं हम विश्व के सबसे अधिक युवा जनसँख्या वाले देशो में शुमार है।  पैंसठ प्रतिशत से ज्यादा युवा 35 साल से काम आयु के हैं। आने वाले समय में ये युवा न केवल भारत की बल्कि पूरे विश्व के विकास की इबारत लिखेंगे। 

मुझे इस बात की प्रसन्नता है किं नीति निर्माण के समय से ही हम इस बात पर एकमत थे किं व्यवस्थित, तार्किक और व्यावहारिक नीति, उसका बेहतर नियोजन, शुरुआती बिंदु से लेकर निगरानी और मूल्यांकन  के माध्यम से उद्देश्यों की पहचान करना हो चाहे सफल क्रियान्वयन का विषय हो -यह सब सार्थक हितधारक जुड़ाव से संपन्न होगा।

इस संवाद से जहाँ क्षमता सुधार में सफलता मिली वहीँ उनका  परामर्श हमारे लिए एक-एक उपयोगी चेक-शीट बन कर उभरा। वैसे भी जनतंत्र में हितधारकों के साथ सार्थक संवाद स्थापित करना जिम्मेदारी से सरकार चलाने का अभिन्न अंग है। नयी शिक्षा नीति एक ऐसे समय में आयी जब विश्व कोविड महामारी की चुन्नौती को झेल रहा था। भारत समेत COVID-19 के कारण दुनिया भर में स्कूल बंद हो गए हैं। विश्व आर्थिक फोरम के अनुसार वैश्विक स्तर पर 1.2 अरब से अधिक बच्चे कक्षा से बाहर रहे। इसका परिणाम यह निकला की ई-लर्निंग के विशिष्ट उदय के साथ, शिक्षा में नाटकीय रूप से बदलाव आया है, जिससे डिजिटल प्लेटफॉर्म शिक्षण का महत्वपूर्ण आधार बन गया।

यह अत्यंत संन्तोष का विषय रहा कि  हमने चुन्नौतियों को अवसरों में बदलने का संकल्प लिया और 33 करोड़ विद्यार्थियों की शिक्षा को निर्बाध रूप से चलाने में सफलता पायी। नयी शिक्षा नीति से हम विद्यार्थियों, अध्यापकों, शोधार्थियों शिक्षिक नेतृत्व की सोच में व्यापक  बदलाव लाना चाहते हैं। बुनियादी ढांचे के दृष्टिकोण से, हर जिले में उच्च शिक्षा संस्थानों) के माध्यम से जिला स्तर पर आत्मनिर्भरता, और क्लस्टरिंग दृष्टिकोण, डिजिटल शिक्षा के साथ मिलकर, जिला और उप-जिला स्तर पर बहुत जरूरी अंतर को भर देगा।

विज्ञान, गणित, कला क्लबों की स्थापना अधिक जिज्ञासा पैदा करने और एक व्यक्ति को आजीवन सीखने वाले में बदलने का तरीका है। नेशनल रिसर्च फाउंडेशन रिसर्च आउटपुट को एक नए स्तर पर ले जाएगा। संस्थानों के शासन में पूर्व छात्रों की भूमिका शिक्षा प्रणाली को समग्र रूप से प्रभावित करेगी।

अच्छी बात यही  रही  कि नीति के माध्यम से हम सम्पूर्ण शैक्षिक इकोसिस्टम परिवर्तित करने हेतु पूरा देश प्रतिबद्ध दिखा। इसी संकल्प का परिणाम रहा कि हम नीति में समकालीन विषय जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजाइन थिंकिंग, होलिस्टिक हेल्थ,ऑर्गेनिक लिविंग, इमोशनल हेल्थ,एनवायर्नमेंटल एजुकेशन,ग्लोबल सिटिजनशिप एजुकेशन,सर्वागीण विकास इत्यादि को शामिल कर पाए।

NIPUN – पढ़ने में प्रवीणता समझ और संख्यात्मक ज्ञान विकसित करने के लिए राष्ट्रीय पहल के माध्यम से हम अपने बच्चो को मजबूत आधार देने का प्रयास कर रहे हैं। प्रगति कार्ड के माध्यम से  हम व्यापक कौशल, संज्ञानात्मक, स्नेह, सामाजिक-भावनात्मक और साइकोमोटर डोमेन पर दशा केंद्रित कर पाएंगे। पुरानी रटने परिपाटी छोड़कर अब की बोर्ड परीक्षा मुख्य रूप से मुख्य रूप से अर्जित दक्षता का परीक्षण करेगी।

चाहे 10 + 2 संरचना का प्रतिस्थापन 5 + 3 + 3 + 4 का विषय हो,नए स्कूल शिक्षा सुधार के साथ रॉट लर्निंग के साथ दूर करने का विषय हो,गतिविधि-आधारित,प्रायोगिक शिक्षा, कम्प्यूटेशनल सोच,बहु-विषयक और महत्वपूर्ण सोच-आधारित सीखने की बात हो,  पारंपरिक भारतीय मूल्यों को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाने शामिल करना की बात हो  इस नीति में के माध्यम से हमारा लक्ष्य आत्मविश्वासी बच्चों का विकास करना है जो अपनी जड़ों, संस्कृति और पारंपरिक प्रथाओं का भरपूर ज्ञान के माध्यम से अपना सर्वागीण विकास  सुनिश्चित  कर   सकेंगे। पहली बार कौशल वृद्धि और क्षमता निर्माण के मामले में विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है।

हमारा मानना है किं जब आप एक बार कौशल सीख लेते हैं तो यह संपूर्ण जीवन में सहायक होती है। योग्यता मूल्यांकन शिक्षा को और अधिक सार्थक बना कर और मौजूदा सैद्धांतिक शिक्षा डिजाइन में परिवर्तन के कारण ड्रॉपआउट का मुद्दा संबोधित हो सकेगा।

दो साल के डिप्लोमा, एक लंबे डिग्री कोर्स, और एक अकादमिक क्रेडिट बैंक, और क्रेडिट स्कोर के साथ MOOCS (बड़े पैमाने पर ओपन ऑनलाइन पाठ्यक्रम) के संबंध में नए उपाय किए गए हैं। निजी और सार्वजनिक संस्थानों के मूल्यांकन के लिए समान बेंचमार्क सुनिश्चित करके, हम सबको सामान अवसर देकर शैक्षिक संस्थानों से बेहतर परिणामों के लिए तत्पर हैं।

चाहे शिक्षक भर्ती प्रक्रिया हो, कार्यकाल ट्रैक, और प्रतिभाशाली लोगों को शिक्षा की ओर आकर्षित करने  के लिए उपलब्ध प्रशासनिक पदों में परिवर्तन मौलिक परिवर्तन हैं यह सारे कदम गुणवत्तापरक और नवचारयुक्त शिक्षा को बढ़ावा देने में मददगार साबित होंगे। विश्व पटल पर रैंकिंग के क्षेत्र में भी हमारा ग्राफ निरंतर बढ़ता रहे इसलिए वैश्विक स्तर पर नेटवर्क स्थापित किये जा रहें हैं। 

नयी शिक्षा नीति 2020 को गुणवत्ता, पहुंच, जवाबदेही, सामर्थ्य और समानता का आधार स्थापित हुआ है इसका पूरा श्रेय उन सभी हितधारकों को देना चाहता हूँ जिन्होंने अपनी चिंताओं, अपेक्षाओं, सुझावों से न हमें अवगत कराया परन्तु आगे बढ़ने का मार्ग भी प्रशस्त किया।

विदेशो से मिले सुझावों ने इस नीति को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का सफलतापूर्वक मुकाबला करने के आगे बढ़ने की राह दिखाई। कुल मिलकर नीति समावेशी, भागीदारी और समग्र दृष्टिकोण से परिपूर्ण है। जो विशेषज्ञ राय, क्षेत्र के अनुभव, अनुभवजन्य अनुसंधान, हितधारक प्रतिक्रिया, साथ ही सर्वोत्तम प्रथाओं से सीखे गए पाठों को ध्यान में रखकर सृजित की गयी है।  

एनईपी के प्रत्येक पहलू के लिए कार्यान्वयन योजनाओं को विकसित करने के लिए केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर संबंधित मंत्रालयों के सदस्यों के साथ विषयवार समितियों राज्य शिक्षा विभाग, स्कूल बोर्ड, एनसीईआरटी, केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी सहित कई निकायों द्वारा बेहतर समन्वय से हम अपने लक्ष्यों के तरफ तेजी से अग्रसर हैं।

एनईपी देश के शिक्षा क्षेत्र को सम्पूर्ण विश्व के लिए पूरी तरह से खोल देगा। भारत में शीर्षतम विदेशी विश्वविद्यालयों के परिसरों के खुलने से भारतीय और विदेशी विश्वविद्यालयों के बीच अनुसंधान सहयोग और छात्र विनिमय कार्यक्रमों को बढ़ावा मिल सकेगा। एनईपी भारत को एक वैश्विक शिक्षा के आकर्षक  गंतव्य के रूप में स्थापित करेगा, साथ ही  दुनिया को शांतिपूर्ण, सहिष्णु, रहने योग्य और अधिक मानवीय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा ।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति नव भारत के निर्माण की दिशा में एक बड़ी छलांग है। देश इस बात के लिए प्रतिबद्ध हैं किं इसकी व्याख्या और कार्यान्वयन इसकी मूल भावना के अनुरूप सुनिश्चित किया जाए। 

पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत के लिए  इस शिक्षा नीति के रूप में एक आधारशिला  रखी गयी है। मुझे पूरा विश्वास है कि नीति के सफल क्रियान्वयन में सभी हित धारको का वही सहयोग मिलेगा जो नीति निर्माण के समय मिला था। नीति के भव्य दृष्टिकोण को धरातल पर उतारने के लिए सभी का सहयोग अत्यंत आवश्यक है क्योंकि तभी हम  एक वैश्विक ज्ञान महाशक्ति के रूप में भारत का पुनर्निर्माण कर सकते  है।