
रंगमंच एवं लोक प्रदर्शन कला विभाग दून विश्वविद्यालय द्वारा एक दिवसीय बाल नाट्य समारोह का आयोजन किया गया। इस नाट्य समारोह में पचास से अधिक बाल कलाकारों ने प्रतिभाग किया। दून विश्वविद्यालय के थिएटर विभाग के चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रोजेक्ट कार्य के अंतर्गत देहरादून के विभिन्न विद्यालयों में बाल रंगमंच कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।

इस कार्यशाला के समापन अवसर पर सभी विद्यालयों में तैयार किए गए नाटकों का मंचन किया जाएगा। यह कार्यशाला देहरादून के रेनेसां द्रोण सीनियर सेकेंडरी स्कूल (डोईवाला),फिल्फोट पब्लिक स्कूल,सेंट पॉल हाई स्कूल(क्लेमेंट टाउन)तथा गुरुकुल कन्या महाविद्यालय सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों में संचालित हो रही है।
रेनेसां द्रोण सीनियर सेकेंडरी स्कूल(डोईवाला)के बच्चों द्वारा सात दिन का इंतजार नाटक का का मंचन किया गया। नाटक में कुछ लोग अपने माता पिता को बोझ समझते हैं,जिन माता पिता ने हमें जन्म दिया,पालन किया,हम उन्हीं को वृद्ध आश्रम भेज देते हैं। यह नाटक उन माता पिता की पीड़ा को बयां करता है,जिन्हें उनके बच्चों ने बोझ समझकर वृद्ध आश्रम भेज दिया है।
सेंट पॉल हाई स्कूल(क्लेमेंट टाउन)के बच्चों अनपढ़ राजा नाटक का मंचन किया जिसमें एक अज्ञानी और संकीर्ण सोच वाले राजा की कथा है,जो अपनी मूर्खता में वृक्षों का विनाश करवा देता है और कूड़ा-कचरा नदी में डलवाकर जल-स्रोत को नष्ट कर देता है। इसके परिणामस्वरूप पशु-पक्षी नगर छोड़ देते हैं और जल का भी अभाव हो जाता है। अंततःअपनी गलती समझकर राजा पश्चाताप करता है और प्रकृति संरक्षण का संकल्प लेता है।
फिल्फोट पब्लिक स्कूल के बच्चों द्वारा के नई दिशा नाटक खेला गया। नाटक की कहानी बताती है कि हर व्यक्ति में कमियाँ और खूबियाँ होती हैं। यदि हम अपनी खूबियों को पहचानें और सही मार्गदर्शन मिले,तो जीवन में आगे बढ़ सकते हैं। एक शारीरिक रूप से कमजोर बच्चा,माता-पिता और गुरुओं के सहयोग से आत्मविश्वास पाकर प्रगति की राह पर चल पड़ता है।
कार्यशाला में विभाग के छात्र-छात्राओं-राजेश भारद्वाज,सरिता जुयाल,ज्योत्सना इस्तवाल,भाविक पटेल,सरिता भट्ट,विनीत पवार,अनुराधा खडूरी,चेतना,प्रणव पोखरियाल,अंजेश कुमार,सोनिया,जयशंकर,रमन आदि द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

नाटक में प्रतिभाग करने वालों में काव्या,शौर्य,अक्षत,वाणी,केशव,कनिष्क,आदित्य,अरिहंत,अंशुमन,साक्षी,भव्या,प्रिशा,मानसी,गुरूम,शिवांश कलाकारों शामिल थे।
इस मौके पर दून विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.सुरेखा डंगवाल ने बाल उलार नाट्य समारोह के अवसर पर अपने संदेश में कहा कि रंगमंच व्यक्तित्व विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है और यदि इसकी शुरुआत विद्यालय स्तर से हो,तो विद्यार्थियों की नींव और अधिक सुदृढ़ होती है। उन्होंने इस प्रकार के आयोजनों को बच्चों की सृजनात्मक क्षमता,आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति कौशल को विकसित करने का प्रभावी माध्यम बताया।
इसी क्रम में,डायरेक्टर आई.क्यू.ए.सी.प्रो.एस.सी.पुरोहित ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि रंगमंच विभाग के छात्रों के लिए यह अनुभव उनके भविष्य की पहली सीढ़ी सिद्ध होगा। उन्होंने बाल उलार नाट्य समारोह को विद्यार्थियों के व्यावहारिक ज्ञान,रचनात्मक सोच और मंचीय अनुभव को समृद्ध करने वाला महत्वपूर्ण अवसर बताया।
बाल नाट्य समारोह में दुर्गेश डिमरी,देवंडु रावत,रोहित जोशी डॉ.अजीत पंवार एवं डॉ.कैलाश कंडवाल उपस्थित रहे।

















