उत्तराखंड-त्रिवेंद्र सिंह रावत के मुख्यमंत्री काल में दर्ज राजद्रोह मामले में राज्य सरकार पीछे हटी,अब सुप्रीम कोर्ट से एसएलपी नहीं होगी वापस

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उत्तराखंड सरकार अब पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी)  वापस नहीं लेगी। बताया जा रहा हैं कि धामी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई एसएलपी को यथावत रखने का फैसला लिया है। जिसके तह्त शासन ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी वापस लेने संबंधी पत्र को निरस्त कर दिया है।

आपको बता दें कि सरकार ने सितंबर में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र के विरुद्ध भ्रष्टाचार के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट के सीबीआइ जांच के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाली याचिका को वापस लेने के लिए पत्र लिखा था,जिसे अब निरस्त कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी में अंदर खाने इस मामले को लेकर चल रहे विरोध और त्रिवेंद्र सिंह रावत की नाराजगी के बाद धामी सरकार ने ये फैसला लिया है।

इससे पहले सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से एसएलपी वापस लेने का मन बना लिया था। लेकिन त्रिवेंद्र रावत की हाई कमान के सामने जबरदस्त नाराजगी के बाद सरकार ने अपना इरादा बदल दिया है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में सरकार की एडवोकेट ऑन रिकार्ड (एओआर) वंशजा शुक्ला को भी सूचना भेज दी गई है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में दी गई अर्जी को वापस लेने के संबंध में आवेदन भी कर दिया गया है। अब इस मामले को लेकर 22 नवंबर को सुनवाई होनी है।

आपको बता दें कि वर्ष 2020 में जब त्रिवेंद्र रावत मुख्यमंत्री थे,तब हाइकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए थे और वहाँ पत्रकार व वर्तमान खानपुर विधायक उमेश शर्मा पर राजद्रोह का केस चलाने पर निर्णय मांगा था। लेकिन उत्तराखंड सरकार ने इसी वर्ष सितंबर में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र के विरुद्ध भ्रष्टाचार के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट के सीबीआइ जांच के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाली याचिका को वापस लेने के लिए पत्र लिखा था। जिसे अब निरस्त कर दिया गया है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने दी सफाई

इसे मुद्दे और काग्रेस के आरोपों को बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि पार्टी पूरी तरह से एकजुट और पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि त्रिवेंद्र सिंह रावत पार्टी के सम्मानित और वरिष्ठ नेता है लिहाजा कांग्रेस को किसी मामले में अन्यथा नहीं लेना चाहिए।

श्री भट्ट ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट से कोई एसएलपी वापस नहीं ली गयी है। हालांकि यह मामला मुख्यमंत्री और सरकार से संबंधित होने के कारण इस पर अधिकृत जानकारी सरकार ही दे सकती है। उन्होंने कांग्रेस को नसीहत देते हुए कहा कि किसी भी जानकारी के पुख्ता होने से पहले कांग्रेस तिल का ताड़ बनाने और दुष्प्रचार से बाज आये।