टिहरी गढ़वाल के भिलंगना नदी पर बन रहे हाइड्रोप्रोजक्टों के विरोध में ग्रामीणों के साथ जन प्रतिनिधि भी हुए शामिल

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टिहरी गढ़वाल के भिलंगना नदी पर बन रहे हाइड्रोप्रोजक्टों के विरोध में स्थानीय ग्रामीणों के साथ अब जन प्रतिनिधि भी शामिल हो गए है। इससे पहले स्थानीय लोगों ‘भिलंगना जल जंगल जमीन बचाओ संघर्ष समीति’  का गठन कर पहले से ही भिलंगना नदी पर बन रहे हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट के खिलाफ मोर्चा खोला है। अब जन प्रतिनिधि भी इन पावरप्रोजेक्टों के खिलाफ लामबंद होने शूरु हो गऐ है।

भिलंगना नदी पर बन रहे हाइड्रोप्रोजक्टों के विरोध में स्थानीय जिला पंचायत सदस्या देवलंग भिलंग में सीता रावत ने इस विषय को पुरजोर तरीके से जिला पंचायत सदन में रखा। उन्होंने सदन को अवगत कराया कि पूर्व में बने दो हाईड्रोप्रोजक्टों से पहले ही इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। पर्यावरण नुकसान के साथ अभी भी इन कम्पनियों के साथ हुए स्थानीय करार पुरे नहीं हुए है। पानी के कई स्रोत सुख चुके है, लोगों के घरो में दरारे पड़ी है। भिलंगना में पानी न होने कि स्थिति में स्थानीय बिखोत पर्व भी अपना अस्तित्व खो चुका है। हमारे अपनो कि अधजली लाशों को जंगली जानवर खा रहे है। हमारी इस पीड़ा को कोई नहीं समझ रहा है।

जिला पंचायत सदस्या ने बताया कि इन कंपनियों के कर्मचारी आए दिन हमारे स्थानीय बैरोजगार युवाओं का माखोल उड़ाते है। कपंनी की मनमानी के चलते आज हमारे बिखोत मेले, राणीगढ मेले, मां नंदा भगवती का स्नान, इत्यादि पर्वों पर भी प्रभाव पड़ रहा है। प्रवास की समितियों जिसमें पर्वतीय लोकविकास समिति, भिलंगना क्षेत्र विकास समिति इत्यादि भी इन पावरप्रोजेक्टों के विरोध में उतर चुकी हैं। अब अगर और पावरप्रोजेक्ट बनते हैं तो स्थानीय लोग आंदोलन करने के लिए बाधित होंगे।

हाइड्रोप्रोजक्टों के विरोध में लांबध हुए ग्रामीणों के विरोध का संज्ञान लेते हुए जिला पंचायत अध्यक्षा सोना सजवाण ने इस विरोध पर पुर्ण सहमति जताते हुए कहा की इस प्रकार की जन विरोधी परियोजनाओं का विरोध नितांत आवश्यक है। ऐसे निर्माण कार्यों से पूर्व स्थानीय लोगों एवं जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लैना जरूरी हैं। ऐसे निर्माणों से उत्तराखंड में चमोली जैसी घटना की पुनारावृत्ति न हो यह भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

इस मौके पर उपस्थित सभी जिला पंचायत सदस्यों ने इन पावरप्रोजेक्टों के विरोध का पूर्ण समर्थन करते हुए जिला पंचायत अध्यक्षा के नेतृत्व में जिलाधिकारी को पत्र भेज,निवेदन किया यदि भिलंगना नदी पर बन रहे हाइड्रोप्रोजक्टों से हमारे गांव-खेत-खलिहानों और जनमानस को किसी भी तरह से नुकसान होता हैं तो भी हम सब एक बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। भिलंगना जल जंगल जमीन बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष भजन रावत एवं सभी संघर्ष समिति के पदाधिकारियों,जिला पंचायत सदस्यों, पर्वतीय लोक विकास समिति, भिलंगना क्षेत्र विकास समिति और  सभी समितियों ने उनके बात सुनने और सहयोग करने के लिए जिला पंचायत अध्यक्षा सोना सजवाण का आभार प्रकट किया है।