प्रसिद्ध छायाकार राकेश सहाय को उनकी पुण्यतिथि पर ऋषिकेश में किया गया याद

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वन्य-जीवन को समर्पित छायाकार राकेश सहाय आखरी समय तक अपने पेशे को समर्पित रहे। जिस दिन उन्होंने अंतिम सांस ली, उस दिन भी वे मध्यप्रदेश के पेंच राष्ट्रीय पार्क में अपने काम में मुब्तिला थे। कला में साधना समर्पण और एकाग्रता चाहिए जो राकेश सहाय के छाया चित्रों में दिखती है। उक्त विचार प्रसिद्ध छायाकार राकेश सहाय की स्मृति में वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी ललित मोहन रयाल ने व्यक्त किए।

शुक्रवार को उनकी पुण्यतिथि पर ओशो गंगाधाम में उनके छाया चित्रों की प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में वन्यजीव, पहाड़ का जीवन व बद्री-केदार सहित हिमालय के सौंदर्य से संबंधित छाया चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई जो तमाम उपस्थिति के लिए बेहद आकर्षण का केंद्र रही। इस अवसर पर ओशो धाम में एक  कैलेंडर का भी विमोचन किया गया।

स्वामी विश्व स्वरूपानंद व प्रसिद्ध रंगकर्मी श्रीश डोभाल व बोधि वर्तमान ने राकेश सहाय के जीवन से जुड़ें कई  संस्मरण साझा किए। विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि  नेचर फोटोग्राफी व राकेश सहाय एक-दूसरे के पूरक थे जिसे वे कैमरे की आंख से जीवंत कर देते थे। फोटोग्राफी को लेकर उनका जुनून कई छायाकारों के लिए प्रेरणा का सबब है।

इस अवसर पर डॉ जेपी मेहता,राजेश थपलियाल,आशीष डोभाल,त्रिभुवन चौहान,मनोज रतूड़ी,प्रबोध उनियाल कंचन रांगड़ ,अमित डंगवाल व विजय लक्ष्मी भट्ट आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन कृष्णा डोभाल ने किया।