लाकडाउन में रियायत पर आम,जन करें शारीरिक दूरी का पालन

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कमल किशोर डुकलान

लाकडाउन में अमल से पहले ही आम जन में सार्वजनिक स्थलों पर लापरवाही देखने को मिल रही है।आंशिक छूट पर मास्क का सही तरह से इस्तेमाल न करने वालों की संख्या बढ़ रही है। शारीरिक दूरी बनाए रखना एवं मास्क का सही प्रयोग करना प्रत्येक का राष्ट्रीय कर्तव्य होना चाहिए।

उत्तराखंड में कर्फ्यू के दौरान व्यापारिक गतिविधियों को धीरे-धीरे शिथिल होने का सिलसिला एक प्रकार से शुभ संकेत है, क्योंकि आर्थिक-व्यापारिक गतिविधियां शुरू होने से ही जीविका के साधनों को बल मिलेगा। पिछले 40-50 दिनों में लाकडाउन के चलते व्यापारिक, आर्थिक गतिविधियां ठप सी है, इसलिए कोशिश इस बात की होनी चाहिए कि लाकडाउन के समय जो आर्थिक नुकसान हुआ,उसकी जल्द से जल्द भरपाई हो। बेहतर होगा कि उत्तराखंड सरकार ने लाकडाउन में छूट के साथ जो शर्तें लगाई गई हैं,वे आर्थिक-व्यापारिक गतिविधियों को रफ्तार देने में बाधक न बनें। इसी के साथ आम जनता की भी यह जिम्मेदारी है कि वह आर्थिक गतिविधियों के  संचालन में नियमानुसार सतर्कता का परिचय दे। आम जन को यह ध्यान रखा रखना चाहिए कि कोरोना संक्रमण को काबू में रखना आम लोगों के बलबूते ही संभव है। राज्य सरकार तथा जिलों का प्रशासन एक सीमा तक ही लोगों को सतर्क रहने के लिए प्रेरित कर सकता है। उनकी ओर से कोरोना संक्रमण से बचे रहने के उपायों को लेकर रोक-टोक करने,जुर्माना लगाने आदि की अपनी एक सीमा है। यदि लोग स्वेच्छा से इन उपायों का पालन नहीं करते तो हालात हाथ से फिर फिसल सकते हैं। इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि संक्रमण की दूसरी लहर ने इसीलिए प्रचंड रूप धारण किया,क्योंकि लोगों ने ऐसे व्यवहार करना शुरू कर दिया था,जैसे कोरोना पर विजय पा ली गई हो। कम से कम अब तो वैसी भूल नहीं की जानी चाहिए।

लाकडाउन में रियायत पर अमल के पहले ही सार्वजनिक स्थलों पर लोगों की लापरवाही देखने को मिलने लगी है जो कि ठीक नहीं है।मास्क का सही तरह से इस्तेमाल न करने वालों की गिनती करना मुश्किल है। तमाम लोग ऐसे दिखते हैं,जो मास्क लगाए तो होते हैं, लेकिन ढंग से नहीं पहने रहते हैं। कम से कम अब तो लोगों को यह बुनियादी बात समझ में आनी ही जानी चाहिए कि मास्क को नाक के नीचे रखने या ठुड्डी पर अटकाने का कोई मतलब नहीं है। इसी तरह यह भी स्वीकार्य नहीं कि सार्वजनिक स्थलों पर शारीरिक दूरी के पालन की अनदेखी हो।

मास्क का सही इस्तेमाल और सार्वजनिक स्थलों पर शारीरिक दूरी का परिचय तो प्राथमिकता के आधार पर देना चाहिए। सच तो यह है कि इस मामले में हर कोई दूसरों के लिए उदाहरण बनना चाहिए। आम नागरिकों को चाहिए कि वे ऐसे लोगों को रोकें-टोकें जो मास्क सही तरह नहीं पहनते या फिर शारीरिक दूरी का पालन करने में कोताही बरतते हैं। वास्तव में यह हर किसी का राष्ट्रीय दायित्व होना चाहिए। लोग अपने इस दायित्व के प्रति सतर्क रहें,इसके लिए उत्तराखंड की राज्य सरकार आये दिन लगातार  नए सिरे से दिशानिर्देश भी जारी जारी कर रही है।