Dehradun:-कला दर्पण नाट्य संस्था द्वारा उपन्यासकार डा.हरिसुमन बिष्ट के चर्चित उपन्यास ‘आछरी-माछरी’ पर नाटक का मंचन

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देहरादून में टाउन हाल के प्रेक्षागृह में कला दर्पण नाट्य संस्था द्वारा ‘आछरी’ नाटक का मंचन किया गया। इस नाटक में पहाड़ की महिलाओं की पीड़ा,उनका संघर्ष और उनके अधिकारों की कहानी को दिखाया गया। नाटक हिंदी के प्रतिष्ठित उपन्यासकार डा.हरिसुमन बिष्ट के चर्चित एवं पठनीय उपन्यास ‘आछरी-माछरी’ पर आधारित है। इस उपन्यास का अंग्रेजी (द सागा आफ ए मौउंनटेन गर्ल ) सहित कई भारतीय भाषाओँ में अनुवाद हुआ है।


आछरी नाटक में पहाड़ की एक लड़की की कथा को दिखाया गया। इसमें नियति कदम-कदम पर लड़की की परीक्षा लेती है। किन्तु आछरी हर घटना को चुनौती के रूप में लेती है और हर विपरीत परिस्थिति में चट्टान की भांति खड़ी हो जाती है। नाटक में पहाड़ के एक गाँव डूंगर पुर की अति संवेदनशील कहानी है। गाँव में बीसियों समस्याएं हैं। किंतु पानी की समस्या सबसे बड़ी समस्या है। गाँव में बढ़ते वन्य जीव संघर्ष को भी शिद्दत के साथ रखा गया है। जहाँ वन्यजीव नरभक्षी हो चुके हैं, वहीँ वन्यजीवों से प्रेम का मार्मिक दृश्य भी खींचा गया है।
नाटक का हर दृश्य मोहक और पहाड़ के जनजीवन को प्रदर्शित करता दस्तावेज का रूप ले लेता है। नाटक की मुख्य नायिका आछरी है, उसके इर्द गिर्द कहानी का तानाबाना बुना गया है। गाँव प्रधान तुलसा भी आछरी को डगमगाने में असमर्थ रहता है। पंचायत के भ्रष्ट अधिकारियों और कागजों में होने वाले कार्यों को भी खुलकर प्रदर्शित किया गया है। भ्रष्टाचार से तंग आकर पूरा डूंगरपुर गाँव द्वारा आछरी को ही गाँव में निर्विरोध प्रधान चुन लिया जाता है। तुलसा से प्रधानचारी छीन लेने में सहायक उसकी पत्नी चंद्रा और उनकी बहू जयंती तक आछरी का भरपूर साथ देती हैं।


पहाड़ के जीवन पर आधारित इस उपन्यास का नाट्य रूपांतरण,परिकल्पना और निर्देशन वरिष्ठ रंगकर्मी डा.सुवर्ण रावत ने किया है। डा.सुवर्ण रावत इसका मंचन हिंदी में थियेटर-इन-एडुकेशन-‘टी.आई.ई.कंपनी’,नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा-‘एन.एस.डी.’नई दिल्ली के लिए २०२० में तथा फिर गढ़वाली में मंचन गढ़वाली,कुमाऊनी और जौनसारी अकादमी,दिल्ली सरकार के लिए अक्टूबर २०२३ और पिछले दिनों माघ मेला उत्सव,उत्तरकाशी में जनवरी २०२४ को भी ‘आछरी’ नाटक का सफल मंचन किया। गढ़वाली में डॉ.सुवर्ण की तीसरी सफल प्रस्तुति है।
नाटक में आछरी की भूमिका में जानी-मानी वरिष्ठ अभिनेत्री सुषमा बड़थ्वाल ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी। नाट्य आलेख का अनुवाद और नाटक में तुलसा की दमदार भूमिका सुपरिचित रंगकर्मी मदन मोहन डुकलान ने निभाई। विशन सिंह,साहब,जयदत्त,जुनजुनाली,गोधना,मोहना में क्रमशःदिनेश बौड़ाई, विजय गौड़,धीरज सिंह रावत,अनामिका,वीरेन्द्र असवाल,सुमित वेदवाल ने अपने-अपने पात्रों की भूमिकाएं बखूबी निभाई। बीरेंद्र गुप्ता,अंशिका के अलावा,सुरक्षा रावत,संतोष गैरोला,माधवेन्द्र रावत,आयुष्मान,गायत्री रावत ने डूंगरपुर निवासी पात्रों की भी भूमिकाएं सराहनीय रही।
सतेन्द्र परिंदिया,मनीष एवं दीपा पंत का गीत-संगीत और गायन के साथ-साथ टी.के.अग्रवाल की प्रकाश परिकल्पना,अभिनव गोयल का ध्वनि प्रभाव एवं श्रीवर्णा रावत की कोरियोग्राफी ने नाटक आछरी को प्रभावशाली बना दिया।
इस अवसर पर मुख्य अथिति गढ़ रत्न नरेन्द्र नेगी,विशिष्ठ अतिथि प्रो.सुरेखा डंगवाल,वाइस चांसलर,दून यूनिवर्सिटी,डा.हरिसुमन बिष्ट,हिंदी के प्रतिष्ठित साहित्यकार और जयदीप सकलानी,राज्य आंदोलनकारी की गरिमामयी उपस्थिति रही।


मुख्य अतिथि नरेन्द्र सिंह नेगी ने कहा,यह नाटक आछरी के माध्यम से पहाड़ के जीवन को और वहां के संघर्ष को दिखाता है वहीं युवाओं को अपनी लोक भाषा से जुड़ने में कारगर है। प्रो.सुरेखा डंगवाल ने अपने वक्तव्य में कहा,पहाड़ की महिला जीवन संघर्षों का एक जीवन्त दस्तावेज है। नाटक ‘आछरी’,भरपूर मनोरंजन के साथ पहाड़ी महिला के जीवन-संघर्ष और सामाजिक उठापटक के यथार्थ से दर्शकों को झकझोरता है।
नाटक के मूल लेखक डॉ.हरिसुमन बिष्ट ने गढ़वाली में नाट्य प्रस्तुति पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि किसी लेखक के लिए यह सौभाग्य की बात है की वह अपनी रचना को एक नए रुप में प्रदर्शित होते देख रहा है। यह नाटक सुपरचित रंगकर्मी अविनंदा,प्रदीप घिल्डियाल,रोशन धस्माना,डॉ.सविता मोहन,संगीता ढोंडियाल,सुधा जुगरान,डॉ.एम.आर.सकलानी,महाबीर सिंह बिष्ट आदि गणमान्य व्यक्तियों के साथ दर्शकों ने मंत्रमुग्ध होकर नाटक का स्वागत और भरपूर प्रशंसा की। इस आयोजन का कुशल संचालन पं.उदयशंकर भट्ट ने किया।