आजादी के बाद पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री पहुंचे सीमांत जनपद चमोली की दुर्मी घाटी,क्षेत्र के लिए की कई घोषणाएं

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सरकार जनता के द्वार’ के सिद्धांत को सार्थक करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत बुधवार को सीमांत जनपद चमोली की एक ऐसी घाटी में पहुंचे, जहां देश की आजादी के बाद से अब तक प्रदेश के किसी भी मुख्यमंत्री ने आना मुनासिब नहीं समझा। दुर्मी नाम की इस दुर्गम घाटी की जनता ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को सम्मानित करने के लिए आमंत्रित किया था। बीते 9 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस पर ऐतिहासिक दुर्मी ताल (तालाब) के पुनर्निर्माण की घोषणा किए जाने के एवज में जनता ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत का सम्मान किया।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने दुर्मी-निजमुला घाटी में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खोलने समेत बदरीनाथ विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए बुनियादी सुविधाओं से संबंधित लगभग एक दर्जन घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहाड़ की महिलाओं के सिर से घास का बोझ हटाने की योजना बना रही है, इस योजना को अमल में लाने के लिये आगामी बजट में धनराशि की घोषणा की जाएगी। इस योजना को अगले पांच वर्ष में पूरी तरह धरातल पर उतार दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अपने चमोली दौरे के दौरान ऐतिहासिक दुर्मि ताल पहुंच कर क्षेत्रीय लोगों द्वारा आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम में शामिल हुए दसौली ब्लॉक के दुर्मी ताल 70 के दशक में पर्यटन की दृष्टिकोण से विश्व प्रसिद्ध था। सुमित ताल के टूटने के बाद दोबारा इस और किसी ने भी मुड़कर नहीं देखा वर्तमान क्षेत्र प्रतिनिधियों द्वारा सामाजिक और राजनीतिक तरीके से इस मुद्दे को एक बार पुनर्जीवित करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सामने दुर्मि ताल के जिर्णोधार की अपील की और इसके सुनहरे भविष्य और रोजगार के अवसर को लेकर मुख्यमंत्री को अवगत करवाया। जिस पर मुख्यमंत्री ने गंभीरता दिखाते हुए गैरसैण में दुर्मिताल के जीर्णोद्धार की घोषणा करते हुए 25 लाख रुपए राशि जारी की इस घोषणा के बाद दुर्मि ताल के जीर्णोद्धार की उम्मीदें प्रबल होने लगी वसूली ब्लॉक के दुर्मी निर्मला ईरानी क्षेत्र के लोगों द्वारा मुख्यमंत्री के इस निर्णय को लेकर उनका अभिनंदन कार्यक्रम आयोजित किया गया और मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

 मुख्यमंत्री की गर्मी ताल पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने कहा कि त्रिवेंद्र रावत ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं। जो इस ऐतिहासिक स्थल पर पहुंचे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर दुर्मी ताल का जीर्णोद्धार हो जाता है तो इससे पूरे चमोली जिले के युवाओं के लिए साहसिक पर्यटन और पर्यटन के दृष्टिकोण से रोजगार के अवसर सृजित होंगे और एक तरफ पलायन पर भी रोक लग पाएगी।  उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का आम जनमानस की मांग को गंभीरता से लेना सराहनीय है। इसके लिए क्षेत्रवासी मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हैं।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दुर्मी ताल पहुंचकर क्षेत्रीय जनता को संबोधित करते हुए कहा कि दुर्मी ताल को पर्यटन का रूप बनाया जाएगा और स्थानीय लोगों द्वारा इस ऐतिहासिक दुर्मी ताल के जीर्णोद्धार के लिए जो मांग रखी है। उस पर सरकार जल्द से जल्द से काम शुरू करेगी और क्षेत्रीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करेगी,पर्यटन विभाग और संबंधित विभागों को लेकर योजना बनाए जाने के लिए निर्देशित किया गया है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जनहित में किए जाने वाले योजनाओं की भी बात कही।

दुर्मी घाटी में 14 ग्राम पंचायत शामिल हैं। घाटी की जनसंख्या लगभग 8000 है। विकास और बुनियादी सुविधाओं की दृष्टि से इस घाटी में अभी बहुत कुछ होना बाकी है। यहां की जनता पिछले कई वर्षों से सन 1970 की बाढ़ में टूट चुके दुर्मी ताल की मांग कर रही है। जिसकी घोषणा मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत पहले ही कर चुके हैं। इस मौके पर क्षेत्रीय विधायक महेन्द्र भट्ट, भाजपा के जिलाध्यक्ष रघुवीर बिष्ट, दर्जाधारी राज्यमंत्री रिपुदमन सिंह रावत, जिला सहकारी बैंक चमोली के अध्यक्ष गजेन्द्र सिंह रावत आदि मौजूद रहे।