कोविड निदान में योग और आयुर्वेद की भूमिका

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कमल किशोर डुकलान

कोविड-19 के संक्रमण बचाव में जहां वैक्सीन अथवा टू डी जी जैसी दवाओं पर आम जन की निर्भरता बढ़ रही है और हर संक्रमित स्वशन क्रिया में कृतिम प्राण वायु का सहारा ले रहा है। जिसमें उत्तम स्वास्थ्य और संतुलित-अनुशासित जीवनशैली के लिए योग और आयुर्वेद की भूमिका और भी बढ़ जाती है।

कोविड-19 के संक्रमण बचाव में जहां वैक्सीन अथवा टू डी जी जैसी दवाओं पर आम जन की निर्भरता बढ़ रही है। हर संक्रमित स्वशन क्रिया में कृतिम प्राण वायु का सहारा ले रहा है वहीं इस प्रकोप के बाद से प्रतिरक्षा बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल,संक्रमण को खत्म करने के लिए संतुलित-अनुशासित प्राकृतिक जीवनशैली में योग को अपनाने की चारों तरफ चर्चा रही है। ऐसा इसलिए है,क्योंकि चिकित्सा की इस प्राचीन पद्धति में बीमारी की अपेक्षा मनुष्य का सरोकार योग से रहा है। जहां योग हमारी बीमारी की रोकथाम तथा रक्षा तंत्र को मजबूत बनाता है तथा योग से जीवनी शक्ति को बल मिलना आयुर्वेदिक उपचार में प्रमुखता से शामिल है।यह मुख्य रूप से फिजियोलॉजी (शरीर क्रियाविज्ञान) को मजबूत करने पर बल देती है,ताकि व्यक्ति बीमार न पड़े और यदि बीमार हो भी जाए तो शरीर को अधिक नुकसान पहुंचे बिना ठीक हो जाए।

आयुर्वेद और आयुर्वेदिक उपचार मानव केंद्रित हैं। जिन लोगों का प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होता है,वो बीमारियों की चपेट में जल्दी नहीं आते हैं और अगर आ भी जाते हैं तो उसका मुकाबला कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र वालों की तुलना में बेहतर तरीके से कर पाते हैं।आज पूरा विश्व कोविड-19 के संकट से जूझ रहा है। एक अच्छी प्रतिरक्षा प्रणाली कोविड-19 की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण है और इस बीमारी के बढ़ते प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए आयुर्वेदिक में योग कारगर है।भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा हाल ही में कोविड-19 के विरुद्ध लड़ाई में जो प्रोटोकाल जारी किया गया है उसमें आयुर्वेद के महत्व को स्थान दिया गया है। आयुर्वेदिक दवाएं न केवल बीमारियों को रोकने और ठीक करने में सक्षम हैं,बल्कि बीमारियों के पश्चात होने वाली जटिलताओं के प्रबंधन में भी सहायक हैं। इसमें समस्थिति या संतुलन पाने के लिए ‘मानव शारीरिक क्रिया विज्ञान’ का समर्थन किया जाता है। यह कोविड-19 के दौरान विकसित होने वाली जटिलताओं से निपटने के लिए भी सत्य है।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा जारी प्रोटोकाल में कोविड-19 की रोकथाम, इसके उन मामलों में जिनमें मामूली या कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं,के लिए आहार के उपायों,योग और आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों तथा रसायनों को सूचीबद्ध किया गया है। क्योंकि प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में आयुर्वेद रसायन स्थाई भूमिका निभाते हैं, जिससे संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर बनता है। जो शरीर के संक्रमण को बचाने के साथ-साथ संचारी रोगों के प्रसार को भी रोकता है।

मुख्य ऋतुओं में बदलते मौसम से हमारा शरीर प्रभावित हुए बिना नहीं रहता। सर्दियों में विभिन्न प्रकार के संक्रमणों से लेकर ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट अटैक की चपेट में आने की आशंका बढ़ जाती है,लेकिन कुछ उपायों को अपनाकर हम इनकी चपेट में आने से बच सकते हैं। अधिक प्रोटीन और कम वसा वाला भोजन जैसे दालें,साबुत सोयाबीन, फलियां प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाते हैं।  अनार,सेब,मौसमी,स्ट्राबेरी और पाइनएप्पल जैसे फलों के सेवन करने से हमारा शरीर प्रतिरक्षा प्रणाली से मजबूत बनाता है।

योग से हमें न सिर्फ शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने में सहायता मिलती है बल्कि,मानसिक शांति भी प्राप्त होती है। नियमित रूप से योग का अभ्यास हमारे प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाता ही है साथ में बीमारी व अनेक प्रकार के संक्रमण से भी बचाता हैं। आज नियमित योग अभ्यास चिकित्सकीय उपचार के साथ तनाव के नकारात्मक आक्रमण को कम कर रहा है यह कोविड-19 संक्रमण के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है