महाकवि प्रेमलाल भट्टःनिर्वाण के बाद साहित्य जगत की एक पीढ़ी का अन्त

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दिनेश ध्यानी

उत्तरायण महाकाव्य सहित हिन्दी और गढ़वाली भाषा में लगभग पैंतीस साहित्यिक कृतियां लिखने वाले महाकवि प्रेमलाल भट्ट के निधन के बाद दिल्ली में साहित्यकारों की एक पीढ़ी का अन्त हो गया है। आपका जन्म 8 मई, 1931 को ग्राम सिमेन, देवप्रयाग, उत्तराखण्ड में हुआ था।

सरकारी सेवा में रहते हुए हिन्दी एवं गढ़वाली भाषा में लगभग तीस-पैंतीस पुस्तकें लिखीं जिनमें अधिकांश उपन्यास एवं कविता संग्रह हैं। गढ़वाळी भाषा में उत्तरायण महाकाव्य मुख्य है। आपने हिन्दी, अंग्रेजी के दो शब्दकोशों का भी सफल सम्पादन किया। इसके अतिरिक्त समय-समय पर कई पत्र-पत्रिकाओं में लेख, कहानियां, संस्मरण और भूमिका लिखते रहे हैं। गढ़वाळी भाषा में उमाळ कविता संग्रह गरीबी का घोषणा पत्र है। भागै लकीर वर्तमान युग की सार्थक चिन्ताधारा को प्रतिबिबिंत करती है। भागै लकीर कविता संग्रह में सभ्यता का गूढ़ अर्थ में विज्ञान का विनाशी रूप से जोड़कर दुत्कारना सहित सर्वेंश्वर कृष्ण की कविता संग्रै में बहुत ही स्तरीय भूमिका है।

सत्तर, अस्सी के दशक में दिल्ली एनसीआर में साहित्यिक गतिविधियों के आयोजनों और नई पीढी को लिखने के लिए प्रेरित करने में आपकी सहभागिता अद्भुत है। उम्र का नब्बे दशक में भी महाकवि श्री प्रेमलाल भट्ट जी का मन बालसुलभ भावों और कवि के रूप में उनके अन्दर वही युवा कवि जिन्दा था। आपकी रचनाओं से लेकर आपकी काव्यपाठ की अद्वितीय शैली सबको आकर्षित करती रही है।

हिन्दी में आपकी प्रमुख रचनाओं में जो कि मुख्यतः उपन्यास ही हैं। गंगोत्री से गंगा सागर तक, संधि-पत्र, शिल्पी, गौरा, द्रोणचाय्र की पराजय, तपोवन से स्वर्गारोहण, पितरों का घर, शोक कथा लौटकर, क्रांति, आलोकिता, मानुषी, हम विषपायी, नान्या गति, राजनेता, माॅं, प्रेयसी और पत्नी, यक्ष प्रश्न, उन्नीसवां पुराण, अश्वत्थामा हतः, आलंबुषा, वह थी ही शोभना। इसके अतिरिक्त गढ़वाली में प्रमुख कविता संग्रह इस प्रकार से हैं। उमाळ, भागै लकीर खण्डकाव्य, उत्तरायण महाकाव्य, एवं कुतग्यळि कविता आदि प्रमुख हैं। आपको साहित्य अकादमी सम्मान, हिन्दी अकादमी सम्मान सहित दर्जनों साहित्य सम्मान समय-समय पर प्राप्त हुए हैं। वर्ष 2012 से वर्ष 2014 तक उत्तराखण्ड लोक भाषा साहित्य मंच दिल्ली एवं वर्ष 2015 से वर्ष 2020 तक महेश्वरी देवी-कुलानन्द बुड़ाकोटी स्मृति न्यास के साहित्य सम्मान चयन समिति के आप अध्यक्ष रहे हैं। आपके कुशल नेतृत्व में कई साहित्यकारों को आगे बढने का हौसला मिलता रहा है। लगभग तीस साल पहले भारत सरकार से बतौर निदेशक सेवानिवृत्त होने के बाद आप सपरिवार दिल्ली में रह रहे थे।

हाल ही में 23 अक्टूबर, 2020 को आपके निवास में आपसे मुलाकात हुई थी तक पता नहीं यह आपसे आखरी मुलाकात होगी। आपसे मुलाकात के दौरान बहुत सी बातें हुई और आपने कवितापाठ भी किया। अस्वस्थ आप थे लेकिन फिर भी आपकी हालात ऐसी नहीं थी कि इतनी जल्दी आप इस दुनियां को अलविदा कह दें। लेकिन काल के आगे किसी की नहीं चली और आप भी काल से हार गए और 6 दिसम्बर, 2020 को आपने दिल्ली में आखरी सांस ली। साहित्य के क्षेत्र में आपका योगदान सदा ही याद किया जायेगा। आपकी कमी परिजनों सहित साहित्य विरादरी एवं समाज के हर वर्ग को हर समय खलती रहेगी। आप सदा हमारी स्मृतियों में जिन्दा रहोगे आदरणी भट्ट जी।