क्यों अद्भुत,अविश्वसनीय,अकल्पनीय होगा देश का नया संसद भवन

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जगमोहन ‘आज़ाद’

दस दिसंबर 2020 को भारत के लोकतंत्र में एक नये अध्याय की शुरुआत हुई। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नए संसद भवन का भूमि पूजन किया। आजादी के 75 वर्ष पूरे होने तक संसद का यह भवन बन कर तैयार हो जाएगा और इसी के साथ 93 वर्ष पहले अंग्रेज़ों द्वार बनाए गया पुराना संसद भवन इतिहास बनकर रह जाएगा। दरअसल वर्तमान संसद भवन वही भवन हैं जहां बैठकर अंग्रेज भारत को सदियों तक गुलाम बनाए रखने के लिए कानून तैयार किया करते थे। 1947 में अंग्रेज़ों को भारत छोड़ना पड़ा लेकिन 73 वर्षों के बाद भी भारत की सरकारें इस सांकेतिक ग़ुलामी से देश को मुक्ति नहीं दिला पाईं थी।

लेकिन जब 2022 में भारत आजादी की 75वीं सालगरिह मनाएगा। तब तक यानि 21 महिनों में यह भवन बनकर तैयार हो जाएगा और इसे देश की समर्पित कर दिया जाएगा,अर्थात एक सांकेतिक गुलामी से देश मुक्ति भी पाएगा। इस लिए इतना तो कह सकते हैं कि यह भवन अद्भुत तो हैं ही।

10 दिसंबर गुरूवार को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन के निर्माण के लिए विधिवत भूमि पूजन कर इसकी आधारशिला रखी तो,उनके चेहरे की गौंरवित छवि को पूरी दुनिया ने देखा। नए संसद भवन के भूमि पूजन के बाद प्रधानमंत्री ने कहां,आज का दिन मील का पत्थर है। नए संसद भवन का निर्माण नूतन और पुरातन का उदाहरण है। इन क्षणों के हम साक्षी हैं,यह हमारे लिए गर्व की बात है।

प्रधानमंत्री ने भावुक्ता भरे शब्दों में अपने पहली बार सांसद के तौर पर संसद आने के पलों को याद करते हुए कहां कि ‘मैं अपने जीवन में उस क्षण कभी नहीं भूल सकता,जब मैंनें 2014 में पहली बार एक सांसद के तौर पर संसद भवन की सीढ़ियों को चढ़ा था। उन क्षणों में मेरी आंखों में अपनी संसद के लिए कुछ अलग तरह का स्वपन था। उन स्वपन को अब हम भारत के लोग मिलकर अपनी संसद के इस नए भवन को बनाकर पूरा करने जा रहे है। हम सब के लिए इससे सुंदर क्या होगा, इससे पवित्र क्या होगा कि जब भारत अपनी आजादी के 75 वर्ष का पर्व मनाए,तो उस पर्व की साक्षात प्रेरणा,हमारी संसद की नई इमारत बने’। 

प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी का यह सपना निश्चित तौर पर 2022 में भारत की आजादी के 75वें वर्ष में पूरा होने जा रहा है। जिसकी परिकल्पना के अद्भुत रंग पूरी दुनिया देखेगी,और 93 साल बाद भारत को एक अद्भुत,अविश्वसनीय और अकल्पनीय संसद भवन मिलेगा।

आखिर देश के नए संसद भवन में ऐसा क्या है अद्भुत,अविश्वसनीय और अकल्पनीय चलिए हम आपको बताते है

  • भारत के वर्तमान संसद भवन निर्माण 93 साल पहले अंग्रेजों ने 83 लाख रुपये में करवाया था। इसका का डिजाइन उस दौर से मशहूर ब्रिटिश वास्तुविद एडविन के लुटियन ने साल 1912-13 में बनाया था। जिसके बाद इस भवन का निर्माण 1921 से 1927 के बीच हुआ था।
  • इस संसद भवन का उद्घाटन सन् 1927 में भारत के तत्कालीन वायसराय लार्ड इरविन ने किया था। भवन का निर्माण अंग्रेजों ने दिल्ली में नई प्रशासनिक राजधानी बनाने के लिए किया था।
  • वर्तमान संसद भवन वही भवन हैं जहां बैठकर अंग्रेज भारत को सदियों तक गुलाम बनाए रखने के लिए कानून तैयार किया करते थे।
  • पुराने संसद भवन से अलग भारत का नया संसद भवन जिसकी परिकल्पना प्रधानमंत्री मोदी ने की है। इस भवन में आधुनिक तकनकी और आधुनिकों जरूरतों का समावेश होगा।
  • नये संसद भवन का प्रस्ताव मौजूदा लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला और उपराष्ट्रपति वैंकैया नायडू ने अगस्त 2019 में रखा गया था। जिसके अनुसार नया संसद भवन 64500 स्क्वायर मीटर में बनाया जाएगा,जो चार मंजिला होगा और इसका खर्च 971 करोड़ रुपये आएगा। जिसे 2022 तक तैयार किया जाएगा।
  • नये संसद भवन में सभी सांसदों के लिए विशेषतौर पर दफ्तर बनाए जाएंगे। जिसे  2024 तक तैयार कर लिया जाएगा।
  • नये संसद भवन का डिजाइन HCP डिजाइन मैनेजमेंट ने किया है,जिनका कार्यलय अहमदाबाद है। इस भवन का निर्माण टाटा प्रोजेक्ट्स द्वारा किया जाएगा।
  • देश के नये संसद भवन में ऑडियो-विजुअल सिस्टम,डाटा नेटवर्क फैसिलिटी का विशेष  ध्यान रखा जा रहा है। इस भवन में कुल 1224 सांसदों के बैठने की सुविधा होगी। इनमें 888 लोकसभा चैंबर में बैठ सकेंगे,जबकि राज्यसभा चैंबर में 384 सांसदों के बैठने की सुविधा होगी।
  • संसद के नये भवन में लोकसभा और राज्यसभा कक्षों के अलावा एक भव्य संविधान कक्ष भी होगा। जिसमें भारत की लोकतांत्रिक विरासत दर्शाने के लिए अन्य वस्तुओं के साथ-साथ संविधान की मूल प्रति,डिजिटल डिस्पले आदि होंगे।
  • नया संसद भवन केंद्र सरकार की योजना सेंट्रल विस्टा के तहत बनाया जा रहा है। जिसमें संसद भवन के अलावा प्रधानमंत्री कार्यालय,राष्ट्रपति भवन और आसपास के इलाकों का नवीनीकरण भी किया जाएगा।

इसलिए भारत का नया संसद भवन अद्भुत,अविश्वसनीय,अकल्पनीय होगा। जिसके बारे में प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी ने कहां की आजादी के 75 वर्ष का स्मरण करके इसका निर्माण होगा। भारत का लोकतंत्र पश्चिमी देशों को समझाया जाता है। जब हम विश्वास के साथ अपने लोकतांत्रिक इतिहास का गौरवगान करेंगे तो वो दिन दूर नहीं जब दुनिया भी कहेगी- India is mother of democracy (भारत लोकतंत्र की जननी है)। 21वीं सदी की दुनिया भारत को अहम लोकतांत्रिक ताकत के रूप में आगे बढ़ते देख रही है।

आपको बता दें कि भारत ने नये संसद भवन के निर्माण के बाद मौजूदा भवन को एक म्यूजियम के तौर पर रखा जाएगा, उसमें काम भी चलता रहेगा।

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